मान लीजिए, मजीठिया बोर्ड के बारे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया कि सारे अखबारों के कर्मचारियों को बोर्ड की सिफारिशों के मुताबिक वेतन दिया जाए। इसके बाद मैं अपने जैसे पत्रकारों के बारे में सोचता हूं। वे रिटायर लोग जो अपनी नौकरी के दौरान मजीठिया बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार अपने वेतन में इंटरिम रिलीफ पा रहे थे, उनका क्या होगा? मैं जनसत्ता के कोलकाता संस्करण से ३१ दिसंबर २०१३ को रिटायर हुआ।
उसके साल या दो साल पहले से मुझे मजीठिया बोर्ड की सिफारिशों के मुताबिक अंतरिम राहत या इंटरिम मिल रहा था। अब जब मैं रिटायर हो गया हूं तो मुझे फैसला पक्ष में आने पर कैसे लाभ मिलेगा? इस मामले के जानकार मित्र कृपया अपनी राय प्रकट करें। इस मामले में कई पत्रकार मित्र खोज बीन और अध्ययन कर रहे हैं। एक पत्रकार महेश्वरी प्रसाद मिश्र की बात भड़ास ४ मीडिया पर आ चुकी है। इस पर बात और विमर्श आगे बढ़े तो अच्छा हो। आखिर मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को दफनाया तो जा नहीं सकता। सुप्रीम कोर्ट में मामला है। जरूर कोई न कोई सार्थक फैसला आएगा ही।
विनय बिहारी सिंह
कोलकाता
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