यशवंत जी, जैसा कि आपने लिखा है कि सुभाष चंद्रा के वीडियो में कोई दुरव्यवहार नज़र नहीं आ रहा. ठीक बात है, बिल्कुल ठीक बात है। इस वीडियो देखकर कहावत याद आई “बौरानी बिल्ली खंबा काटने दौड़ती है”. नवीन जिंदल की हालत भी कुछ ऐसी ही है। बंदे पे एआईआर हो रखी है, अखबार लिख रहे हैं कि कंपनियों ने कोल फाइल गायब कराई, संसदीय क्षेत्र में सीट बचाना मुश्किल हो रहा है. सीबीआई ने डंडा कर रखा है, उपर से सतीश के सिंह और उनके सहयोगी भी काम ना आए.
ऐसे में जिंदल बदला लें तो कैसे लें? दरअसल इस वीडियो से ये भी लगता है कि जिंदल वो घटना दोहराना चाहते थे जो उनके साथ हुई थी। मैं उस घटना की बात कर रहा हूं जिसमें उनके सामने पत्रकार ने माइक लगाया था और जिंदल बदतमीजी पर उतर आए थे और कैमरे व रिपोर्टर को थप्पड़ जड़ दिया था। वीडियो में जो पत्रकार (जिंदल के गुर्गे) दिख रहे हैं, वो एनई, हमार, फोकस टीवी के हैं और वो जिस तरह से सुभाष चंद्रा पर टूट पड़े, उससे पता चलता है कि बाइट लेना उनका मकसद नहीं बल्कि वो हालात पैदा करना उनका मकसद था कि सुभाष चंद्रा झुंझला जाएं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
दरसल जिंदल खुन्नस में ये भूल गया है कि जिस टीम की बदौलत वो जी से दुश्मनी निकालना चाह रहा है वो खुद जी में रहकर जी का गुड़गोबर कर चुकी है. ऐसे में साफ झलकता है कि जिंदल बदला लेने के लिये छटपटा रहा है। एक बात और कि ये बात जिंदल को कैसे पता लगी कि सुभाष चंद्रा पुलिस से मिलने जा रहे हैं? और किससे कितने बजे मिलने वाले हैं? इसका मतलब ये है कि जिंदल सुभाष चंद्रा की एक एक गतिविधि पर नज़र रखे हुए है और दिल्ली पुलिस में नवीन जिंदल के नज़दीकी लोगों ने ये खबर लीक कर दी कि ज़ी का मुखिया किससे मिलने वाले हैं. ऐसे में ये सवाल उठता है कि दिल्ली पुलिस से नजदीकी किसकी है? जांच को कौन प्रभावित कर सकता है, जिंदल या चंद्रा? दिल्ली पुलिस के नज़दीकी होने के कारण कही जिंदल जांच को तो तो प्रभावित नहीं कर रहा? ठीक वही सवाल जो एनई, हमार, फोकस के पत्रकार (जिंदल के गुर्गे) सुभाष चंद्रा से पूछ रहे थे, वो सवाल जिंदल से पूछा जाना चाहिये ।
नीलकमल
एक विश्लेषक
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