Chanchal Bhu : …तो हम बात कर रहे थे, सब्जियों की. महगी सब्जियों की, उन सब्जियों की जो महगी हैं.. और जो ये सब्जिया महगी हैं… इनके दाम आसमान पर हैं … इन महगी सब्जियों की महगाई क्या होती है इसे जानने के लिए हम चलते है उन महगी सब्जियों को देखिये .. इन महगी सब्जियों की मार से त्रस्त आये हैं हमारे स्टूडियो में देश के जाने माने अर्थशास्त्री कुलकर्णी जी … उनके बगल में बैठे प्रसिद्ध पत्रकार …जननेता …राज्य सभा के सदस्य शुक्ला जी, इनके बगल में बैठे हैं …
'इसे बदलो बेटा जब से टीबी आयी है ये उसके पहले से ही यहीं बैठे हैं किसी भी विषय पर इनसे बुल्वालो …
अगले में … दूध सी सफेदी … 'हताओ भाई ..आगे देखो ..
सीरियल है .. एकता कपूर की … माशा अल्ला क्या समाज दिखा रही है ? दिखा नहीं सिखा कहिये हुजूर ,,, औरतें खलनायक?
बंद करो यार.. इससे अच्छा निशा देवी हल्वाइन को लगा दो. प्रवचन तो सुना जाय.
निशा देवी?
इन्हें भी नहीं जानते? कैसे संघी हो भाई. अरे वही जो उस दिन जब एक तरफ बाबरी मस्जिद गिर थी दूसरी तरफ यह मुम्जो के कंधे पर गिर रही थी. क्या बात है कमाल का बोलती है. नहीं तो कल्याण सिंह ऐसे ही सैकडो एकड जमीन उसे चरने के लिए दे देते वो भी कृष्ण धाम में?
नहीं उसे छोड़ो कुछ और लगाओ कि नीद आ जाय. तो ये देखो –
…. इस मुल्क में उत्पादन के दो स्रोत हैं. खेत और कारखाना. जब तक दोनों के रिश्ते नहीं तय हो जाते, हमारे देश का अन्नदाता जिसे किसान कहा जा है वह गाली भी खाता रहेगा और अन्न भी खिलाता रहेगा. उसकी आलू महगी कही जायगी और तीन सौ के ऊपर प्रति किलो बिकनेवाला चिप्स सस्ते में माना जायगा. सड़े चावल का बनने वाला कुरकुरे चार सौ रुपये किलो बिकेगा. क्रीम, साबुन तेल चौदह सौ फीसदी मुनाफे पर चलेंगे लेकिन डिब्बा चुप रहेगा. क्योंकि किसान आर्गनाइजड सेक्टर नहीं है. मूली का विज्ञापन नहीं देगा. लेकिन फिफ्टी फिफ्टी फ़टाफ़ट बिकेगा क्यों कि यह विज्ञापन दाता हैं, जिनके पैसे पर गला फाडू चौरसिया पांच सौ करोड़ का मालिक बना है …
खर्राटे आ रहे हैं… लोग सो गए हैं…
चित्रकार, राजनेता और पत्रकार चंचल के फेसबुक वॉल से.
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