भोपाल : राजधानी स्थित राज्य मंत्रालय की चौथी मंजिल पर आज उस समय हड़कंप मच गया जब एक पत्रकार आत्महत्या के इरादे से जहर खाकर एक अधिकारी के कक्ष में पहुंच गया। उसे गंभीर स्थिति में यहां हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) अंशुमन सिंह ने बताया कि राजेद्र राजपूत (45) की स्थिति गंभीर बनी हुयी है। उनकी स्थिति बेहतर होने पर बयान के आधार पर ही सच्चायी का पता लग सकेगा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार राजेंद्र ने एक सुसाइड नोट एक न्यूज चैनल के कार्यालय में छोड़ा और वह इसके बाद मंत्रालय में पहुंच गये। न्यूज चैनल के कार्यालय से तत्काल पुलिस को सूचना दी गयी। पुलिस फौरन राज्य मंत्रालय वल्लभ भवन पहुंची लेकिन पत्रकार वहां एक अधिकारी के कमरे में पहुंचे और तब तक वह बेहोश होकर गिर पड़े थे। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
सूत्रों ने कहा कि न्यूज चैनल के कार्यालय में उन्होंने बताया था कि वह मंत्रालय में आत्महत्या के इरादे से जा रहे हैं। इसी के बाद पुलिस को सूचना दी गयी। सूत्रों ने घटना की प्रारंभिक जांच पड़ताल और कथित सुसाइड नोट के हवाले से कहा कि एक समाचार पत्र निकालने वाले राजेंद्र राजपूत ने कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले अनेक अधिकारियों के संबंध में जानकारी हासिल करके खबरें प्रकाशित की थीं। इसके अलावा वह इस मामले को लेकर न्यायालय में भी गए थे।
सूत्रों ने कहा कि यही लोग राजेंद्र को परेशान कर रहे थे और उन्होंने इससे परेशान होकर इस घटना को अंजाम दिया। उन्होंने आज की घटना के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को ही जिम्मेदार माना है।
इस बीच विपक्ष के नेता अजय सिंह की ओर से जारी बयान मे आरोप लगाया गया है कि पत्रकार शासन की प्रताड़ना से तंग आ गया था। शासन ने दोषी अधिकारियों-र्कमचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाए उसे ही प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और इस वजह से वह इस तरह का कदम उठाने के लिए मजबूर हुआ।
मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह ने मंत्रालय में एक पत्रकार द्वारा शासन से प्रताड़ित होकर मुख्य सचिव कार्यालय के सामने आत्महत्या का प्रयास करने वाली घटना को शिवराज सरकार की असलियत बताते हुए कहा कि यहीं त्रासदी इस प्रदेश की जनता भी भोग रही है। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि पत्रकार राजेन्द्र कुमार लंबे समय से इस सरकार की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ जूझ रहे थे। वे कुछ मुद्दों को लेकर कोर्ट भी गए थे और कोर्ट ने भी सरकार को आदेश दिए लेकिन सरकार की नाफरमानी के चलते राजेन्द्र कुमार के सामने प्रोटेस्ट करने का एक ही तरीका था आत्महत्या करने का।
श्री सिंह ने कहा कि इसी तरह उमरिया के एक पत्रकार श्री चन्द्रीका राय की हत्या माफियाओं ने कर दी उसे भी सरकार ने गलत रूप दिया। जब इसकी जांच प्रेस कौंसिल ने की उसके जो तथ्य उजागर हुए उससे इस सरकार का असली चेहरा सामने आया। प्रेस कौंसिल ने इस मामले में भी अपनी अनुशंसा सरकार को दी और सरकार उसे दबाकर बैठ गई है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब समाज के जागरूक वर्ग और सशक्त प्रतिनिधि पत्रकारों को न्याय न मिले वह प्रताड़ित हो तो प्रदेश की आम जनता की बदतर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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