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सुख-दुख...

जहर खाने वाले पत्रकार राजेंद्र का निधन, वरिष्ठ पत्रकार जार्ज वर्गीज नहीं रहे

दो दुखद सूचनाएं हैं। भोपाल में अफसरों की प्रताड़ना से तंग पत्रकार राजेंद्र कुमार ने कल जहर खा लिया था जिनका आज अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। भोपाल में मंगलवार देर शाम राज्य सचिवालय के सामने एक स्थानीय पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र कुमार ने खुदकुशी कर ली। इस पत्रकार ने खुदकुशी के लिए मध्य प्रदेश सरकार के 250 से ज्यादा अफसरों को जिम्मेदार ठहराया है।

दो दुखद सूचनाएं हैं। भोपाल में अफसरों की प्रताड़ना से तंग पत्रकार राजेंद्र कुमार ने कल जहर खा लिया था जिनका आज अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। भोपाल में मंगलवार देर शाम राज्य सचिवालय के सामने एक स्थानीय पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र कुमार ने खुदकुशी कर ली। इस पत्रकार ने खुदकुशी के लिए मध्य प्रदेश सरकार के 250 से ज्यादा अफसरों को जिम्मेदार ठहराया है।

पत्रकार ने आरोप लगाया है कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र देकर सरकारी नौकरी पाने वाले ये अफसर उसे परेशान कर रहे थे। खुदकुशी से पहले पत्रकार ने मध्य प्रदेश के डीजीपी को 23 पेज की चिटी भी लिखी है। चिटी में उसने कहा कि मेरी दो बेटियों और बेटे को इंसाफ मिलना चाहिए। राजेंद्र कुमार ने पुलिस महानिदेशक को लिखी चिट्ठी के विषय में लिखा है, खाम्बरा और एसएस भंडारी (तत्कालीन अपर संचालक, अनुसूचित जाति विकास) द्वारा आठ सालों से प्रार्थी को प्रताडित करने, अत्याचार करने, जान से मारने की धमकी देने, अपहरण करने, चरित्र हनन करने के चलते आत्महत्या करने हेतु बाध्य करने।

इसके बाद चिट्ठी का मजमून इस प्रकार है-

प्रार्थी ने ऎसे लोगों के खिलाफ अभियान छेड रखा है जिन्होंने ऎसे लोगों के अधिकारों का हनन कर और उनका शोषण कर सवर्ण जाति का होने के बावजूद फर्जी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाकर शासन और भारत शासन की नौकरी षडयंत्रपूर्वक हासिल कर ली है। प्रार्थी ने लगभग 250 लोगों के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में पीआईएल 4743/2009 दर्ज कर रखी है। प्रार्थी की शिकायत पर मध्य प्रदेश सरकार ने 21 खाम्बरा जाति के लोगों के खिलाफ 20-09-2006 को आदेश पारित किया। उसके बाद इन लोगों ने प्रार्थी के खिलाफ दमन की ऎसी कार्रवाई की कि जीना दूभर हो गया। ये सब धनी और बाहुबली और तिकडमबाज हैं। उनका बाल बांका भी नहीं हो रहा है। पुलिस के 12 लोग हैं, जो झूठी एफआईआर कराकर, मुझे डरा धमकाकर शिकायत वापसी का दबाव डाल रहे हैं। प्रार्थी इसलिए खुदकुशी कर रहा है, क्योंकि उसे न्याय भी नहीं मिल रहा है और भोपाल पुलिस का सहयोग और संरक्षण भी नहीं मिल रहा है। भोपाल पुलिस के हर अफसर के दरवाजे पर दस्तक दी लेकिन न्याय नहीं मिला। इन लोगों ने 12-10-2007 से 22-11-2007 के दौरान मेरा अपहरण कर रायसेन जिले के किशनपुर गांव में रखा। गोविंदपुरा पुलिस और थाना प्रभारी को शिकायत की तो मुझे भगा दिया गया। श्रीमान डीजीपी को ये आत्महत्या पत्र उचित कानूनी कार्रवाई के लिए प्रस्तुत कर रहा हूं। इन हत्यारों को कडा दंड देने की उचित कार्रवाई करें।

पत्र के अंत में राजेंद्र कुमार ने दो तरह के हस्ताक्षर कर कहा है कि वह दो तरह से हस्ताक्षर करता था इसलिए नमूने के तौर पर दोनों हस्ताक्षर किए हैं।

उधर, एक अन्य खबर के मुताबिक वरिष्ठ पत्रकार जार्ज वर्गीज का दिल्ली में एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे समाचार एजेंसी यूएनआई में तीन दशकों से अधिक समय तक काम किया था। वे 67 साल के थे। अपने पीछे बेटे गिरीश और बेटी सूर्या को छोड़ गए हैं, उनकी पत्नी का कुछ साल पहले निधन हो गया था। वर्गीज को एक सप्ताह पहले स्ट्रोक के कारण एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने आज आखिरी सांस ली। उनका अंतिम संस्कार गृह प्रदेश केरल में किया जायेगा।
 
वे सात साल पहले विश्वविद्यालय से न्यूज को-ऑर्डिनेटर के तौर पर रिटायरर हुए थे और प्रसार भारती समेत राष्ट्रीय प्रसारण निगम बोर्ड के सदस्य भी थे। विशेष संवाददाता के तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय और कांग्रेस पार्टी के कई कार्यक्रमों को कवर किया था। कुछ समय के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय के व्यावसायिक ब्यूरो का नेतृत्व भी किया था। वर्गीज विश्व मलयाली परिषद की दिल्ली शाखा के अध्यक्ष और भारत में वाईएमसीए के राष्ट्रीय परिषद के कोषाध्यक्ष भी रह चुके थे। वे मलंकारा रूढ़िवादी सभा के प्रबंध समिति के भी सदस्य थे। वे इसके अलावा कई अन्य संगठनों से जुड़े रहे हैं। 1970 में यूएनआई ज्वाइन करने से पहले कुछ समय तक उन्होंने केरल में सेंट थॉमस कॉलेज में प्राध्यापक के तौर पर काम किया था।

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