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बसपा में बगावत : योगी आदित्‍यनाथ से मिले पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह!

गोरखपुर से खबर है कि होटल क्लार्क इन में आयोजित बसपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में पार्टी के घोषित प्रत्याशियों के विरुद्ध बगावत के सुर सुनाई देने लगे। कार्यकर्ताओं ने मुख्य जोनल कोआर्डिनेटर को लिखकर दिया कि खजनी विधानसभा से घोषित नए प्रत्याशी को बदला जाए। कुछ कार्यकर्ताओं ने तो यहां तक कह दिया कि वह लोग वर्तमान प्रत्याशी के विरुद्ध अपना प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे। बहुजन समाज पार्टी में जब भी प्रत्याशियों को बदला जाता है तब उसकी घोषणा उसके जोनल कोआर्डिनेटर कार्यकर्ताओं की बैठक में करते हैं। उनकी ही घोषणा अधिकृत मानी जाती है।

गोरखपुर से खबर है कि होटल क्लार्क इन में आयोजित बसपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में पार्टी के घोषित प्रत्याशियों के विरुद्ध बगावत के सुर सुनाई देने लगे। कार्यकर्ताओं ने मुख्य जोनल कोआर्डिनेटर को लिखकर दिया कि खजनी विधानसभा से घोषित नए प्रत्याशी को बदला जाए। कुछ कार्यकर्ताओं ने तो यहां तक कह दिया कि वह लोग वर्तमान प्रत्याशी के विरुद्ध अपना प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे। बहुजन समाज पार्टी में जब भी प्रत्याशियों को बदला जाता है तब उसकी घोषणा उसके जोनल कोआर्डिनेटर कार्यकर्ताओं की बैठक में करते हैं। उनकी ही घोषणा अधिकृत मानी जाती है।

रविवार को मुख्य जोनल कोआर्डिनेटर जुगल किशोर शहर में थे। होटल क्लार्क इन में कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की गई थी। मंच पर बैठे जुगल किशोर के पास लगभग एक दर्जन कार्यकर्ताओं ने उनसे लिखित शिकायत की कि खजनी से घोषित प्रत्याशी को बदलकर पूर्व प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया जाए। जोनल कोआर्डिनेटर ने कहा कि वह उनकी भावनाओं को ऊपर तक पहुंचा देंगे। उधर, होटल से बाहर निकलने के दौरान बहुत से कार्यकर्ताओं ने अपना आक्रोश व्यक्त किया। कहा कि निष्ठावान की जगह एक आयातित को प्रत्याशी बनाया गया है। जिसने पार्टी के लिए कोई कार्य नहीं किया उसे टिकट देना कार्यकर्ताओं का अपमान है। शांति देवी नाम की महिला ने कहा कि यदि खजनी से प्रत्याशी नहीं बदला गया तो वह लोग अपना प्रत्याशी उतारेंगे। शांति खुद को बसपा महिला सभा की खजनी तहसील का अध्यक्ष बता रही थीं। वहीं, बसपा के जिलाध्यक्ष रामनयन आजाद ने कहा कि किसी ने कोई विरोध नहीं किया है। बाहर कौन क्या कहता है, उस पर कौन ध्यान देता है। बसपा में महिला प्रकोष्ठ है ही नहीं। शांति कौन हैं, उन्हें नहीं जानते।

पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह योगी के साथ मुलाकात किये और आगे की रणनीति बनाये। बहुजन समाज पार्टी का टिकट कटने के बाद पूर्व वन मंत्री फतेह बहादुर सिंह रविवार को जब अपने विधानसभा क्षेत्र पहुंचे तो लोगों का हुजूम उनके लक्ष्मीपुर स्थित फार्म हाउस पर उमड़ पड़ा। कार्यकर्ताओं के बीच जब वह पहुंचे तो सब खामोश थे। बात शुरू करते हुए कहा कि किसी को फांसी दी जाती है तो उससे उसकी अंतिम इच्छा पूछी जाती है। उन्हें बर्खास्त किया गया, टिकट काटा गया लेकिन ऐसे क्यों हुआ उन्हें नहीं बताया गया। यह कहते हुए वह फफक-फफक कर रो पड़े। फिर माहौल गमगीन हो गया। टिकट कटने के बाद कुछ नेता नए राजनीतिक ठिकाने की तलाश में जुट गए हैं। कैम्पियरगंज से टिकट कटने के बाद पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह एवं सहजनवां से टिकट गंवा चुके कौड़ीराम के विधायक अंबिका सिंह के अब भाजपा में भविष्य तलाशने की चर्चा जोरों पर है।

इन्हीं चर्चाओं के बीच रविवार को फतेह बहादुर सिंह गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। चर्चाओं के मुताबिक पूर्व मंत्री ने योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर कैम्पियरगंज से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी। हालांकि, योगी ने पूर्व मंत्री से मुलाकात होने से इनकार किया है। कैम्पियरगंज से टिकट कटने के बाद पूर्व मंत्री फतेह बहादुर के भावी कदम को लेकर राजनीतिक गलियारे में कयासबाजी का दौर जोर पकड़ चुका है। पूर्व मंत्री के कभी भाजपा तो कभी सपा का दामन थामने की चर्चा भी जोरों पर रही है। इन्हीं कयासबाजियों के बीच फतेह बहादुर सिंह रविवार की सुबह गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। पूर्व मंत्री के मंदिर पहुंचने की खबर मिलने के बाद उनके भाजपा में शामिल होने को लेकर तेजी से अटकलें लगने लगी। इससे पहले शनिवार की रात भाजपा के चुनाव प्रबंधन प्रभारी ह्दयनाथ सिंह भी योगी से वार्ता करने मंदिर पहुंचे थे। यह माना जा रहा है कि क्षेत्रीय चुनाव प्रबंधन प्रभारी पार्टी के केंद्रीय नेताओं का कोई संदेश लेकर मंदिर पहुंचे थे। इसके बाद पूर्व मंत्री फतेह बहादुर के रविवार को मंदिर पहुंचने को भी इसी संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा के मुताबिक पूर्व मंत्री को मेहदावल से लड़ने की हरी झंडी मिलने वाली है। यदि सदर सीट से पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह को भाजपा ने उतारा तो यही कहा जायेगा की योगी ने एक कांटा से दूसरा कांटा निकाल लिया। रविवार व सोमवार को पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह और योगी आदित्यनाथ के गुप्त मिलन की खूब चर्चा रही।

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