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नकवी ने साबित किया, मीडियाकर्मी वाकई कभी रिटायर नहीं होते

Vineet Kumar : इंडिया टीवी के साथ नई पारी शुरु करने पर बहुत बधाई नकवीजी (Qamar Waheed Naqvi). जिस न्यूज चैनल इन्डस्ट्री को हमारी पीढ़ी के कई लोग साल-दो साल बाद ही रचनात्मकता, वैचारिकी और मूल्यों का संकटस्थल मानकर छोड़ दे रहे हैं, उसके प्रति आपकी ललक और उत्साह टीवी टुडे नेटवर्क से विधिवत विदाई और सेवानिवृत हो जाने के बाद भी जस की तस बनी हुई है. आपने हमलोगों के बीच साबित किया है कि वाकई मीडियाकर्मी कभी रिटायर नहीं होते.

Vineet Kumar : इंडिया टीवी के साथ नई पारी शुरु करने पर बहुत बधाई नकवीजी (Qamar Waheed Naqvi). जिस न्यूज चैनल इन्डस्ट्री को हमारी पीढ़ी के कई लोग साल-दो साल बाद ही रचनात्मकता, वैचारिकी और मूल्यों का संकटस्थल मानकर छोड़ दे रहे हैं, उसके प्रति आपकी ललक और उत्साह टीवी टुडे नेटवर्क से विधिवत विदाई और सेवानिवृत हो जाने के बाद भी जस की तस बनी हुई है. आपने हमलोगों के बीच साबित किया है कि वाकई मीडियाकर्मी कभी रिटायर नहीं होते.

बस ये है कि अब फिर से वो चांद, वो ठहरी हुई दुपहरी, लजाती शाम और शनै-शनै दिन की तरफ बढ़ती सुबह आपकी जिंदगी का जरूरी हिस्सा न रह जाए और हम जैसे मीडिया रिसर्चरों के लिए आप वही नकवीजी हो जाएं जिनसे मिलने के लिए कई राउंड में अप्यांटमेंट लेने के बावजूद सीएसडीएस-सराय के रिसर्च प्रोजक्ट सिलसिले में मिलना न हो सका.. फेसबुक से भी आप जल्द ही हम डी क्लास के लोगों के लिए अनुपलब्ध होंगे..लोग नकवीजी की भाषा पाठशाला को मिस्स करेंगे..

लेकिन इन सबके बीच खुशनसीब है इंडिया टीवी कि उसे एडीटोरियल डायरेक्टर के रुप में एक ऐसा शख्स मिलने जा रहा है जो तथाकथित बकवास, वाहियात और उपहास उड़ायी जानेवाली खबरों और कार्यक्रमों के चलाए जाने के पीछे व्यावसायिक दवाब के बीच भी एक ठोस तर्क रखता रहा है. नहीं तो लोग हैं कि सिर्फ धंधे का रोना लेकर बैठ जाते हैं.

आखिर आजतक का तो आपके पास ऐसी खबरों के न केवल चलाने के बल्कि पैदा करने के लंबे अनुभव रहे ही हैं. बस ये है कि इस खबर के साथ जिस नब्बे के आजतक को शुरू करने की क्रेडिट आपके साथ जोड़ी गई, उस आजतक और इस आजतक में सामान्य लोग कन्फ्यूज हो जाएंगे.. अच्छा है कि ये मेल सामान्य दर्शकों के बीच नहीं है. एक बार पुनः बधाई.. कई दफे सेमिनारों में आपने वाहियात और बकवास खबरों के पीछे के तर्कों को भी प्रस्तावित तो किया ही है जो कि यादों के साये की तरह हमेशा साथ रहेंगे.

युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

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