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बाबा और सोना (दो) : शोभन सरकार के बहाने नामी-गिरामी पत्रकारों की कलई खुल रही है

Nadim S. Akhter : जिस तथाकथित साधु- शोभन सरकार- के कहने पर केंद्रीय मंत्री चरण दास महंत ने देश को अंधविश्वास की खाई में धकेलने का काम किया, ASI और GSI को सोना खोजने के लिए किले की निरीक्षण करने के लिए दबाव डाला और अब तथाकथित सोना निकालने वास्ते खुदाई के लिए ASI को राजी भी करवा लिया–उस साधु शोभन सरकार को क्या आपने देखा है टीवी पर? क्या उसकी कोई तस्वीर देखी है अखबारों में?

Nadim S. Akhter : जिस तथाकथित साधु- शोभन सरकार- के कहने पर केंद्रीय मंत्री चरण दास महंत ने देश को अंधविश्वास की खाई में धकेलने का काम किया, ASI और GSI को सोना खोजने के लिए किले की निरीक्षण करने के लिए दबाव डाला और अब तथाकथित सोना निकालने वास्ते खुदाई के लिए ASI को राजी भी करवा लिया–उस साधु शोभन सरकार को क्या आपने देखा है टीवी पर? क्या उसकी कोई तस्वीर देखी है अखबारों में?

जिस शोभन सरकार के सपने वाली बात पर पूरा का पूरा मीडिया फिदा है, क्या मीडिया के दिग्गजों ने उस शोभन सरकार से exclusive interview देश को दिखाना जरूरी समझा? क्या उस आदमी को देश के सामने लाने की जरूरत नहीं है, जो सपने में सोना देखने की बात कहके पूरे देश को गुमराह कर रहा है और ये भी दावा कर रहा है कि अगर सोना नहीं निकला, तो उस पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए. तो फिर शोभन सरकार नाम का यह प्राणी मीडिया के सामने आने की हिम्मत क्यों नहीं रखता?

सामने आता है एक भदेस टाइप का साधु, जो कथित रूप से शोभन का शिष्य है और शोभन के हवाले से वही सारी बात मीडिया को बताता है. ऐसे में मीडिया ये सवाल क्यों नहीं उठा रहा कि अगर शोभन सरकार इतने ही भविष्यदृष्टा हैं, तो पब्लिक के बीच क्यों नहीं आते. जनता से रूबरू क्यों नहीं होते. ये क्या बात हुई कि सारा बवाल आप ही की वजह से, आपके सपने की ही वजह से हो और देश को पता ही नहीं कि शोभन सरकार का चेहरा कैसा है. ताकि झूठा निकलने पर उसे पब्लिक पहचान सके. उसकी बाबागीरी की थू-थू कर सके, जिस तरह आसाराम का हो रहा है.

तो क्या देश में ये शोभन सरकार नाम का प्राणी सुपर पीएम है? सब उसके सामने बौने हैं. केंद्रीय मंत्री से लेकर ASI तक उसके कहने के अनुसार सोना ढूंढ रहे हैं और उस-उस जगह खुदाई करने वाले हैं, जहां शोभन ने बताया है, लेकिन शोभन इस पूरे घटनाक्रम में Public Eye से नदारद हैं. मीडिया के 'भोले-भाले' मित्रों को भी ये गंवारा नहीं कि ढूंढकर उसे पब्लिक के सामने लाए. जिस मीडिया ने ढूंढ-ढूंढकर आसाराम के एक से एक गुप्त तहखाने-आश्रम-कुटीर छान मारे, खूब टीआरपी बटोरी, वही मीडिया अब शोभन सरकार की सूरत दिखाने को तरस रहा है. कहां गया आपका investigative journalism & sting operation?

या फिर आप लोग जानबूझकर शोभन सरकार को एक हौवा बनाए रखना चाहते हैं. एक mystery ताकि उसके नाम से ऊलजलूल दिखाकर टीआरपी दुहते रहें. जिस दिन शोभन पब्लिक के बीच आ जाएगा, सच्चाई सामने आ जाएगी तो पोल खुल जाएगी. आपने अपने-अपने OB Van दिन-रात वहां तैनात जो कर रखे हैं, सीनियर रिपोर्ट्स को भेजा है, इतना खर्चा किया है तो return भी तो चाहिए चैनल को. वरना CEO साहब को क्या जवाब देंगे??

अच्छा है. शोभन सरकार के बहाने नामी-गिरामी पत्रकारों की कलई खुल रही है. भारतीय टीवी न्यूज इडस्ट्री के इतिहास में गणेश-दूध प्रकरण, प्रिंस-गड्ढा प्रकरण, कारगिल वॉर प्रकरण, गुजरात दंगा प्रकरण, अयोध्या फैसला प्रकरण, राडिया टेप प्रकरण जैसे कई मामलों के बाद एक और अध्याय जुड़ जाएगा, जिसकी समीक्षा इतिहास करेगा. हमारी भावी पीढ़ी करेगी और ये तय करेगी की इतिहास-काल के इस चक्र में हमने कैसे फैसले लिए, जिसने उनके कल का निर्माण किया. अच्छा या बुरा, ये वो ही बताएंगे.

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नदीम एस. अख्तर

नदीम एस. अख्तर

इसे कहते हैं सूत ना कपास और जुलाहों में लट्ठम-लट्ठ. एक चैनल खजाने के कथित दावेदारों को स्टूडियो में बिठाकर पूछ रहा है कि खजाना कितना खुद रखेंगे और कितना देश को देंगे. अरे भई, पहले साधु का सपना तो सच हो जाने दो. खजाना मिल जाने दो. खुदाई हो लेने दो. फिर पूछना कि खजाना किसका है. आप तो ऐसे confidence से पूछ रहे हो कि बस खजाना मिल ही गया. इधर खजाना मिला नहीं कि उधर आपकी OB Van का खर्चा वसूल.

लेखक नदीम एस. अख्तर युवा और तेजतर्रार पत्रकार हैं. वे कई अखबारों व न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके हैं.  नदीम से संपर्क 085 05 843431 के जरिए किया जा सकता है.


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