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नकवी ने ज्वाइन किया, रजत शर्मा ने भाषण दिया, कई चर्चाएं शुरू

इंडिया टीवी में कमर वहीद नकवी ने ज्वाइन कर लिया है. आज दोपहर को दोनों शिफ्टों के कर्मियों की एक मीटिंग बुलाकर रजत शर्मा ने नकवी को इंट्रोड्यूस किया. फिर दोनों लोगों ने एक-एक कर भाषण दिया. रजत शर्मा ने कहा कि विनोद कापड़ी गए नहीं हैं, दिसंबर तक छुट्टी पर हैं और फिल्म बनाकर लौट आएंगे. उन्होंने यह भी बताया कि कापड़ी ने पहले फिल्म का कहानी लिखी थी, अब वे खुद डायरेक्शन भी कर रहे हैं.

इंडिया टीवी में कमर वहीद नकवी ने ज्वाइन कर लिया है. आज दोपहर को दोनों शिफ्टों के कर्मियों की एक मीटिंग बुलाकर रजत शर्मा ने नकवी को इंट्रोड्यूस किया. फिर दोनों लोगों ने एक-एक कर भाषण दिया. रजत शर्मा ने कहा कि विनोद कापड़ी गए नहीं हैं, दिसंबर तक छुट्टी पर हैं और फिल्म बनाकर लौट आएंगे. उन्होंने यह भी बताया कि कापड़ी ने पहले फिल्म का कहानी लिखी थी, अब वे खुद डायरेक्शन भी कर रहे हैं.

नकवी के बारे में रजत शर्मा ने बताया कि वे डायरेक्टर न्यूज के रूप में ज्वाइन किए हैं और इनके नेतृत्व में चैनल वहां तक जाएगा जहां तक जाने की किसी ने कल्पना नहीं की होगी. नकवी ने अपने संबोधन में ढेर सारी शिक्षाएं पत्रकारों को दी. उन्होंने कहा कि पत्रकारों को खूब पढ़ना चाहिए. बिजनेस अखबार से लेकर अंग्रेजी अखबार तक को पढ़ डालना चाहिए. ज्ञान बढ़ाना चाहिए. इससे बहुत अच्छा फल मिलता है.

नकवी रजत के भाषण के बाद कर्मचारियों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं. कुछ चर्चाएं इस प्रकार हैं. नंबर एक- कापड़ी क्या नकवी के अंडर में काम करना पसंद करेगा? मतलब ये कि जो विनोद कापड़ी सर्वेसर्वा के रूप में इंडिया टीवी में काम कर चुका हो, वह फिल्म बनाकर लौटने के बाद कमर वहीद नकवी के अधीन रहकर काम कर सकेगा? यह एक तरह से डिमोशन होगा. मतलब साफ है. विनोद कापड़ी अब नहीं लौटेंगे. या तो वो फिल्मी दुनिया और एंटरटेनमेंट चैनलों की दुनिया में रम जाएंगे या फिर अगर लौटेंगे तो किसी दूसरे न्यूज चैनल की पूरी जिम्मेदारी लेकर.

कुछ एक पत्रकारों ने बातों-बातों में कह दिया कि संभवतः न्यूज नेशन चैनल की पूरी जिम्मेदारी कापड़ी लेंगे और शैलेष की पूरी टीम आउट होगी वहां से. चर्चाओं में ओर-छोर ढूंढना मुश्किल होता है, इसलिए बिना ओर-छोर की एक और चर्चा सुन लें जो आज इंडिया टीवी के कर्मियों के बीच छाई रही. वह यह कि कमर वहीद नकवी के नेतृत्व में अगर रजत शर्मा ने इंडिया टीवी के आगे बढ़ने का सपना देखा है तो ये मुंगेरी लाल के हसीन सपने जैसा है क्योंकि कमर वहीद नकवी 'माया मिली न राम' मुहावरा सच साबित करने वाले शख्स हैं. अच्छा गया तो जिम्मेदारी ले लेंगे, बुरा हुआ तो पल्ला झाड़ लेंगे. और, किसी मसले पर आखिरी फैसला लेने से बचने की पूरी कोशिश करेंगे. फैसले लेने का काम अपने अधीनस्थों पर छोड़ देंगे. कुल मिलाकर भयंकर कनफ्यूजन की स्थिति क्रिएट करेंगे.

रही बात आजतक की तो वहां कमर वहीद नकवी केवल सिंबोलिक रूप में सर्वेसर्वा हुआ करते थे. उनके अधीन रहे सुप्रिय प्रसाद या राणा यशवंत ही एक तरह से चैनल चलाते थे और फैसले लेते थे. अब नकवी के न रहने के बाद पूरी तरह सुप्रिय प्रसाद आजतक चैनल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और नकवी के आजतक से जाने का कोई असर आजतक की सेहत पर नहीं पड़ा. वहीं, राणा यशवंत इंडिया न्यूज में दीपक चौरसिया के बाद सारा कामधाम संभाल रहे हैं और इंडिया न्यूज जैसा अनजाना चैनल देखते ही देखते टॉप फोर में पहुंच गया.

तो, नकवी के नेतृत्व में इंडिया टीवी के टीआरपी के रूप में आगे बढ़ने की बात सोचना सपना है. हां, वह एक बुजुर्ग और वरिष्ठ पत्रकार के रूप में चैनल को अपना आशीर्वाद देते रहेंगे, इसमें कोई दो राय नहीं है. खासकर रिटायर आदमी के लिए इससे अच्छी बात क्या होगी कि वह फिर से इतने बड़े चैनल में इतनी बड़ी जिम्मेदारी पा जाए. हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि रजत शर्मा अपने यहां नकवी को टीआरपी के लिए नहीं ले आए हैं बल्कि 'कापड़ी फोबिया' से चैनल को मुक्त कराने के लिए लाए हैं. मतलब ये कि कापड़ी के लंबे समय तक इंडिया टीवी में रहने से वहां का पूरा माहौल कापड़ीमय है. इसलिए नकवी को लाकर वह चैनल को ऐसे लोगों के लिए खोलना चाहते हैं जो ठीकठाक पढ़े लिखे और हिंदी न्यूज इंडस्ट्री को समझने वाले हों.

पहले लोग कापड़ी के क्षुद्र, घटिया, गाली-गलौज और अधैर्य वाले व्यवहार के कारण इंडिया टीवी आने से पूरी तरह इनकार कर देते थे. यही कारण है कि यहां केवल वही आता जो बेहद मजबूर हो या फिर बेहद जूनियर हो या हर दशा में चुप्पी साधकर काम करने में माहिर हो. कापड़ी के समय मुखर और अच्छे जर्नलिस्ट कभी इंडिया टीवी के हिस्से नहीं बने. नकवी को लाकर रजत शर्मा ने एक तीर से दो निशाना साधा है. कापड़ी कांड के बाद बचे उनके अवशेषों को साफ करना, साथ ही अच्छे जर्नलिस्टों को जोड़ने के लिए इंडिया टीवी का माहौल सामान्य करना. अब देखना है कि आगे आने वाले दिनों में कौन-कौन चर्चाएं सच साबित होती हैं और कौन सफेद झूठ. (कानाफूसी)

लेखक यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया के एडिटर हैं. भड़ास तक कोई सूचना पहुंचाने के लिए आप [email protected] पर मेल कर सकते हैं.

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