जी न्यूज के लिए सुधीर चौधरी भरपूर मनहूस साबित होते जा रहे हैं. इस ग्रुप में आते ही खुद जेल गए और मालिकों को भी बुरी तरह फंसवा दिया. हालांकि सब कुछ मालिकों के ही इशारे पर हुआ था लेकिन शुभ-अशुभ भी तो कोई चीज होती है न 🙂 आखिर इसके पहले भी तो यह सब धंधा होता रहा पर क्यों नहीं कभी कोई फंसा और क्यों नहीं कभी मालिकों पर आफत आई :).
अब जी न्यूज वाले खबरें ब्रेक करते जा रहे हैं पर उससे टीआरपी कोई और चैनल पा रहा है. आज देख रहा था जी न्यूज तो सुधीर चौधरी की फटी आवाज सुनकर उन पर तरस आने लगा. गला बिलकुल बैठा हुआ था. लगता है आजकल वो जी न्यूज के सबसे जिम्मेदार अधिकारी होने का दायित्व निभाने और इसका लेबल सीने पर तमगे के रूप में चिपकाने के लिए कहीं किसी जी मीडिया स्कूल (अगर हो तो, न हो तो माफ करिएगा, क्योंकि हर मीडिया हाउस अपना एक स्कूल चलाता है और इस स्कूल से भरपूर धंधा मिलने के साथ-साथ स्मार्ट किस्म के लेबर भी मिल जाते हैं) में बच्चों को चार-पांच घंटा पढ़ाने तो नहीं लगे हैं.
इतनी बुरी आवाज अगर किसी दूसरे एंकर की होती तो खुद सुधीर चौधरी ही उसे भगा देते और आवाज ठीक करने के बाद एंकरिंग करने के लिए आने को कहते. पर जो खुद एडिटर इन चीफ और जिसके एक इशारे पर लोगों को नौकरियां चली जाती हों, नौकरियां लग जाती हों, उसे भला कौन कहेगा. साथ ही इस सुधीर चौधरी नामक तोते में मालिक सुभाष चंद्रा की जान भी फंसी हुई है. अगर इस तोते ने जिंदल रिश्वत कांड प्रकरण में पुलिस को सब कुछ सच-सच बयान कर दिया तो फिर सुभाष चंद्रा का क्या होगा! ऐसे में सुपर पावर की तरह सुधीर चौधरी न सिर्फ कार्यरत हैं बल्कि आन स्क्रीन और आफ स्क्रीन जी न्यूज में भरपूर छाए हुए हैं.
पर उनकी किस्मत को क्या कहा जाए. टीआरपी ससुरी है कि आती ही नहीं. वे फटी हुई आवाज में आज बता रहे थे कि कौटिल्य को सबसे पहले जी न्यूज ने दिखाया. उन्नाव वाले सोने के गांव की खबर को जी न्यूज ने ब्रेक किया. पर उन्हें कौन बताए कि जनाब आपकी ब्रेक की हुई खबरों से टीआरपी तो कोई और ले जा रहा है. कौटिल्य के सहारे दीपक चौरसिया और इंडिया न्यूज अपनी नैया खेने में जुटे हुए हैं. सोने के गांव को दूसरे चैनलों ने लपक लिया है और जी न्यूज से बेहतर कवरेज देने लगे हैं. 41वें हफ्ते की टीआरपी से पता चल रहा है कि जी न्यूज की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. ऐसे में नेक सलाह यही है सुधीर चौधरी जी को कि कुछ दिन आराम कर लें, छुट्टी ले लें. गला वगैरह ठीक कर लें. थोड़ा घूम-घाम लें. फिर नए सिरे से काम में जुटें. नई रणनीति के साथ. संभव है तब कुछ नया कर सकें. (कानाफूसी)
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
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