नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि कारपोरेट घरानों के लिये संपर्क सूत्र का काम करने वाली नीरा राडिया की नौकरशाहों, उद्यमियों और नेताओं के साथ रिकॉर्ड की गई बातचीत से पहली नजर में गहरी साजिश का पता चलता है। न्यायालय ने इसके साथ सीबीआई को छह मुद्दों की जांच के आदेश दिए जो निजी हित के लिये भ्रष्ट तरीके अपनाने से संबंधित हैं।
न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि पहली नजर में इसमें सरकारी अधिकारियों और निजी उद्यमियों की मिलीभगत से गहरी साजिश दिखती है और नीरा राडिया की बातचीत से पता चलता है कि प्रभावशाली व्यक्ति किसी अन्य मकसद से निजी लाभ उठाने के लिये भ्रष्ट तरीके अपनाते हैं।
शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त समिति ने नीरा राडिया के टैप की गयी टेलीफोन बातचीत का विश्लेषण किया था। इस विश्लेषण के आधार पर न्यायालय ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो को दो महीने के भीतर जांच पूरी करके शीर्ष अदालत में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। टेलीफोन बातचीत का विश्लेषण शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त समिति ने किया है। न्यायालय ने जांच का आदेश देते वक्त हालांकि उन छह मामलों का खुलासा नहीं किया जिनकी जांच सीबीआई करेगी, लेकिन इतना अवश्य कहा कि जांच ब्यूरो को इनमें अपराधिता के अंश मिले थे।
न्यायाधीशों ने कथित रूप से न्यायपालिका से संबंधित एक मसला उचित आदेश के लिये प्रधान न्यायाधीश के पास भेज दिया। इसी तरह न्यायालय ने एक अन्य मसला खान विभाग के मुख्य सतर्कता अधिकारी के पास जांच के लिये भेजा है। न्यायालय ने समिति को नीरा राडिया की बातचीत की सारी लिपि की बारीकी से छानबीन करने का निर्देश देते हुये इस मामले की सुनवाई 16 दिसंबर के लिये स्थगित कर दी। न्यायालय ने इस बातचीत का विश्लेषण करने वाले विशेष दल में आय कर विभाग के दस और सब इंसपेक्टर शामिल करने की भी अनुमति प्रदान कर दी है।






