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सारे चैनलों ने जोर लगा लिया लेकिन कमबख्त बाबा ने एक भी बाइट नहीं दी

Nadim S. Akhter : काश, अमेरिका में भी तथाकथित साधु शोभन सरकार जैसा प्राणी होता. तो ओबामा सरकार को पैसे की तंगी के चलते शटडाउन नहीं करना पड़ता. कितना आसाना होता कि साधु बताता सोना कहां है और नासा समेत ओबामा की पूरी टीम खुदाई में लग जाती. नासा मंगल और चांद पर चल रहे अपने अभियान को स्थगित कर देता और अपने उपग्रहों को खजाने की खोज में लगा देता. ये अमेरिका का दुर्भाग्य है कि शोभन सरकार उसके पास नहीं और ये भारत का सौभाग्य है कि ऐसा विचित्र प्राणी और ऐसी विचित्र सरकार-सरकारी महकमा हमारे पास है. वाकई में हम दुनिया में किसी अजूबे से कम नहीं.

Nadim S. Akhter : काश, अमेरिका में भी तथाकथित साधु शोभन सरकार जैसा प्राणी होता. तो ओबामा सरकार को पैसे की तंगी के चलते शटडाउन नहीं करना पड़ता. कितना आसाना होता कि साधु बताता सोना कहां है और नासा समेत ओबामा की पूरी टीम खुदाई में लग जाती. नासा मंगल और चांद पर चल रहे अपने अभियान को स्थगित कर देता और अपने उपग्रहों को खजाने की खोज में लगा देता. ये अमेरिका का दुर्भाग्य है कि शोभन सरकार उसके पास नहीं और ये भारत का सौभाग्य है कि ऐसा विचित्र प्राणी और ऐसी विचित्र सरकार-सरकारी महकमा हमारे पास है. वाकई में हम दुनिया में किसी अजूबे से कम नहीं.

आखिर कौन है ये शोभन सरकार?? आखिर शोभन सरकार नाम का यह प्राणी कौन है, जिसने पूरे देश में तहलका मचाया हुआ है. जिसके सपने को देखकर-भांपकर पूरा देश सपना देखने लगा है. ये क्या कम बात है कि किसी एक का सपना पूरे देश का सपना बन जाए. उन्हें तो पीएम पद का उम्मीदवार बना देना चाहिए. गजबे लीडर है भाई. ये किसी चमत्कार से कम है क्या कि जिसकी सूरत हम-आप देख नहीं पा रहे, जो टीवी कैमरों के सामने नहीं आ रहा, जिसे देश पहचानता नहीं लेकिन उसके सपने को सबने अंगीकार कर लिया है. सभी मिलकर उसके सपने को पूरा करने की जुगत में भिड़ गए हैं. वाह. कितनी एकता है हमारे देश में. कितना भाईचारा है. एक अनजान आदमी के सपने को सच करने का साहस किस सभ्यता में है. यूरोप-अमेरिका की सभ्यता इस मामले में तो हमसे लाखों प्रकाश वर्ष दूर है.

हां, तो ये शोभन सरकार कौन है, किसी को नहीं पता. सिर्फ उसके सपने के बारे में पता है. जितने मुंह, उतनी बातें. तरह-तरह के कयास. शोभन सरकार ये और शोभन सरकार वो..एक मिथक हैं शोभन सरकार. और टीवी कैमरों के सामने उनके भक्त ऐसे कि शोभन साक्षात ब्रह्मा के रूप हैं. उनके चेले जो मीडिया के सामने नंगे बदन आ-आकर साधु के रूप में बयान दे रहे हैं, वो इसकी पुष्टि करते हैं. कहते हैं कि शोभन सरकार ने कह दिया खजाना है, तो है. अगर नहीं होगा, तो उनके कहने मात्र से खजाना जमीन के अंदर आ जाएगा, वह खजाना पैदा कर देंगे. वाह!! क्या बात है. कितने तिलस्मी और चमत्कारी बाबा हैं हमारे देश में. सोने का खजाना पैदा कर सकते हैं.

रिजर्व बैंक के गर्वनर को तत्काल इनसे मिलने चाहिए. देश का आर्थिक संकट दूर हो जाएगा. अब स्विस बैंकों में पड़े काले धन को भी लाने की जरूरत नहीं. कहां हैं बाबा रामदेव और माननीय लालकृष्ण आडवाणी जी. जाइए, साधु शोभन सरकार से मिलिए. आपकी लंबे समय से इच्छा रही है कि काला धन वापस देश में आ आए. यहां तो साक्षात भगवान मिल गए है हमको. स्विटजरलैंड से माथापच्ची की जरूरत ही नहीं. वह तो सीधे खजाना पैदा-उत्पन्न कर देंगे. जल्दी इनसे मिलिए प्रभु. देश का बहुत भला होगा. बाबा रामदेव जी कहां हैं आप??? क्या कहा, करैले का जूस बना रहे हैं, ठीक है-ठीक है.

हां तो बात हो रही थी शोभन सरकार की. सारे चैनलों ने जोर लगा लिया लेकिन कमबख्त बाबा ने एक भी बाइट नहीं दी. एक चैनल का संवाददाता थोड़ा समझदार और साहसी निकला. सो निकल पड़ा भगवान स्वरूप बाबा शोभन सरकार और उनकी कुटिया की खोज में. ओहो. आहा. अति सुंदर. क्या व्याख्या की उन्होंने इस भगवान स्वरूप संत की. दिखाया कि जंगलों के बीच से कैसा ये रास्ता है जो शोभन सरकार के आश्रम तक जाता है. बकौल रिपोर्टर, पहले यहां सब कुछ वीरान था, जब से बाबा आए, हरियाली आ गई. (ये अलग बात है कि रिपोर्टर ने ना ही कभी उस इलाके का इतिहास पढ़ा और ना ही कभी वहां गया था. बस बाबा के चेलों ने जो बताया, सारी बातों को जस का तस अपनी रिपोर्ट में तोते की तरह पढ़ दिया)

खैर, तो बाबा का आश्रम ये रहा. रिपोर्टर दिखा रहा है कि कैसे इस झील के किनारे सुदूर में साधु शोभन सरकार को वह आश्रम दिखाई दे रहा है. कैमरा उधर दिख रहे धुंधले मकानों की तरफ जूम करता है. रिपोर्टर फिर बड़े उत्साह से बताता है कि सबको वहां जाने की इजाजत नहीं, कुछ खास लोग ही वहां जा सकते हैं. (उसके इस वाक्य में ये लाचारगी भी है कि मैं भी नहीं जा सका, नैशनल चैनल का आदमी हूं लेकिन यहां कोई घास ही नहीं डाल रहा). वह बताता है कि किस तरह शोभन सरकार ने अपने आश्रम के लिए किसी मैनेजर को नहीं रखा है, सब काम खुद ही देखते हैं, पूरी कमान उनके हाथ में है (शायद वह बताना चाहता है कि शोभन सरकार नाम का यह साधु बहुत चालू चीज है. आसाराम का हश्र देखिए. सब सेवादारों ने पोल खोल दी, सो शोभन सबकुछ अपने हाथ में रखते हैं ताकि रहस्य बना रहे, कोई राजदार ना रहे). शोभन सुबह-शाम के वक्त चुनिंदा लोगों से ही मिलते हैं और अगर 3-4 घंटे इंतजार करके भी अगर कोई भक्त उनसे मिल पाता है, तो वह खुद को खुशनसीब समझता है कि इतनी जल्दी बाबा से मुलाकात हो गई. बहुत जलवा है बाबा का.

लेकिन किसी और चैनल के रिपोर्टर ने ये गुस्ताखी नहीं की बाबा की शान में. उनकी कुटिया तक जाने की जहमत नहीं उठाई. उनका कोई स्टिंग नहीं किया. इस शोभन सरकार पर तो मुझे शुरू से ही शक है. जब सारे चैनल ये चला रहे हैं कि शोभन को सपना आया वगैरह-वगैरह तो मीडिया के सामने उसका भदेस चेला ओम ये कहता है कि सपने-वपने की बात झूठी है. शोभन ने कोई सपना नहीं देखा. फिर शोभन आज सुबह 4 बजे मीडिया वालों को एक जगह बुलाता है कि भइया आ जाना. आप सबको साक्षात खजाने के दर्शन करवाऊंगा. बेचारे रिपोर्टर्स. देर रात तक लाइव देने के बाद थके-हारे सोए. नींद भी ठीक से नहीं आई. मच्छर-कीट-पतंगों ने वैसे भी उस वीराने में ठीक से सोने नहीं दिया कि सुबह-सुबह 4 बजे उठना पड़ गया. कहीं स्टोरी मिस ना हो जाए. कहीं शोभन ने दूसरे रिपोर्टर्स को खजाना दिखा दिया और मेरी स्टोरी मिस हो गई तो गई नौकरी. सो बेचारे सुबह-सुबह उठकर शोभन की बताई जगह पर पहुंचे लेकिन शोभन खुद नहीं पहुंचा. सबको धोखा दे दिया. बेचारे रिपोर्टर्स हाथ मलते रह गए.

अब शोभन का चेला बता रहा है कि एएसआई जिस तरह धीरे-धीरे खुदाई कर रही है, वैसे खजाना नहीं निकलेगा. शोभन चाहते हैं कि सेना बुलाई जाए. सबहु खुदाई शुरू हो और रात तक खत्म हो जाए. यानी वनडे मैच. तभी खजाना निकलेगा. एएसआई तो महीनों लगा देगी, ऐसे में खजाना मिलने से रहा. तो मतलब साफ है कि खजाना मिलने से रहा. और अगर खजाना नहीं मिलता है तो ढूंढते रहिए शोभन सरकार को. वह तो पर्दे के पीछे है. आप उसका चेहरा-मोहरा तक नहीं जानते.

नदीम एस. अख्तर

नदीम एस. अख्तर

पूरा तमाशा हो चुका है. चैनल वाले टीआरपी बटोरकर वहां से निकल लेंगे. अपना-अपना हिस्सा मांग रहे राजा के तथाकथित वंशज-दत्तक प्रपौत्र भी कट लेंगे. जनता तमाशा देखकर घर जा चुकी होगी. रेहड़ी-पटरी वालों को अतिरिक्त आय हो चुकी होगी. और हम जैसे लोग सिर पीट रहे होंगे कि फेसबुक पर इस महाकवरेज को लिखने में जो इतनी ऊर्जा लगाई, अगर किसी और क्रिएटिव काम में लगाता तो अच्छा होता.

लेखक नदीम एस. अख्तर युवा और तेजतर्रार पत्रकार हैं. कई अखबारों और न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं. नदीम से संपर्क 085 05 843431 के जरिए किया जा सकता है.


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