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अल्बर्ट आइंस्टीन का लिखा एक शोक संदेश जो अदभुत और ऐतिहासिक बन गया (पढ़ें पत्र)

बात 12 फरवरी वर्ष 1950 की है. इस दिन महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने राबर्ट एस. मारकस (विश्व यहूदी कांग्रेस के तत्कालीन राजनीतिक निदेशक) के नाम एक पत्र भेजा. पत्र क्या, यह शोक संदेश था. राबर्ट एस. मारकस के पुत्र का पोलियो से निधन हो गया था. इस दुख के क्षण में शोक प्रकट करने के लिए आइंस्टीन ने मारकस को पत्र लिखा. इस शोकसंदेश में लिखा गया एक-एक वाक्य दर्शन की तरह है, जीवन सूत्र की तरह है. आइंस्टीन द्वारा लिखा गया ओरीजनल पत्र का स्कैन नीचे है और उसके बाद पत्र के कंटेंट की ट्रांसक्रिप्ट भी है…

बात 12 फरवरी वर्ष 1950 की है. इस दिन महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने राबर्ट एस. मारकस (विश्व यहूदी कांग्रेस के तत्कालीन राजनीतिक निदेशक) के नाम एक पत्र भेजा. पत्र क्या, यह शोक संदेश था. राबर्ट एस. मारकस के पुत्र का पोलियो से निधन हो गया था. इस दुख के क्षण में शोक प्रकट करने के लिए आइंस्टीन ने मारकस को पत्र लिखा. इस शोकसंदेश में लिखा गया एक-एक वाक्य दर्शन की तरह है, जीवन सूत्र की तरह है. आइंस्टीन द्वारा लिखा गया ओरीजनल पत्र का स्कैन नीचे है और उसके बाद पत्र के कंटेंट की ट्रांसक्रिप्ट भी है…

Albert Einstein's Typed Letter to Robert S. Marcus (February 12, 1950)


उपरोक्त पत्र की ट्रांसक्रिप्ट यूं है….

February 12, 1950

Dear Mr. Marcus:

A human being is a part of the whole, called by us "Universe", a part limited in time and space. He experiences himself, his thoughts and feelings as something separated from the rest — a kind of optical delusion of his consciousness. The striving to free oneself from this delusion is the one issue of true religion. Not to nourish the delusion but to try to overcome it is the way to reach the attainable measure of peace of mind.

With my best wishes,
sincerely yours,

Albert Einstein.

 

                      Mr. Robert S.Marcus
                      World Jewish Congress
                    1834 Broadway
                     New York 23,N.Y.


आइंस्टीन द्वारा लिखित उपरोक्त लाइनों को अब लोग जीवन देश समाज दुनिया ब्रह्मांड आदि समझने के लिए इस्तेमाल करते हैं और इसे एक दूसरे तक खूबसूरत तरीके से भेजते, शेयर करते हैं, जैसे यूं…


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