Mayank Saxena : साल था 2005, महीना यही था अक्टूबर और तारीख थी 20…दिन भी याद करा देता हूं गुरुवार था…जगह थी मध्य प्रदेश के बैतूल ज़िले का एक अनजाना सा गांव सेहरा…कुंजीलाल नाम के एक महान ज्योतिषी ने अपनी मौत की ख़ुद भविष्यवाणी की थी…ये इतना महान ज्योतिषी था कि इसकी कभी कोई भविष्यवाणी ग़लत साबित नहीं हुई थी…ये अलग बात है कि इस गांव के अलावा इसका कोई नाम तक नहीं जानता था…
17 तारीख से ही कुंजीलाल के घर पर मीडिया की भीड़ जुट गई थी, पीपली गांव के भी 4 साल पहले सेहरा गांव पीपली बन गया था…भीड़, मीडिया, मेला और तमाशा…प्रशासन को आखिर पहरा लगाना पड़ा कि कहीं कुंजीलाल की भविष्यवाणी ज़बर्दस्ती न सच कर दी जाए…एक दाढ़ी वाले पत्रकार कुंजीलाल का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू लाइव कर रहे थे…लेकिन अंततः कुंजीलाल नहीं मरा…पता नहीं कैसे एक महान ज्योतिषी की ये ही भविष्यवाणी ग़लत साबित हुई…ख़ैर अब कुंजीलाल ज़िंदा है या नहीं न मीडिया को पता है, न मीडिया को पता करने की ज़रूरत है…
साल है 2013, महीना वो ही है अक्टूबर और तारीख 18…दिन भी याद कर लीजिए शुक्रवार…जगह उत्तर प्रदेश के अन्नाव ज़िले का अनजान सा गांव डौंडिया खेड़ा…एक और महान साधु ने सपना देखा है…भीड़ है, मीडिया है और मेला भी…सुना है हज़ार टन सोना निकलने वाला है…महान साधु का महान सपना सच होना ही चाहिए…हर बार थोड़े ही कुंजीलाल को ज़िंदा बचना चाहिए…कुंजीलाल मरेगा…जैसे नत्था मरा था…पत्रकारिता तो मर ही चुकी है…ख़ैर इस घटना के बाद शोभन सरकार कहां होंगे क्या मीडिया को पता करने की ज़रूरत होगी…चलिए देखते हैं…इंतज़ार करते हैं…
बस 'स्वप्न में दोष' न निकले कहीं…
बाबा स्वप्नदर्शी शोभन सरकार की जय….
युवा पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.
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