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मध्य प्रदेश

पत्रकार राजेन्द्र राजपूत आत्महत्या मामला : गिरफ्तारी के डर छत से कूदा सिपाही

भोपाल : गोविंदपुरा थाने की छत से कूदकर सोमवार रात एक आरक्षक ने फरार होने का प्रयास किया। आरक्षक को पत्रकार राजेन्द्र सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। छत से कूदने के कारण उसके दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राजेन्द्र सिंह ने अपने सुसाइड नोट रूपी शिकायती आवेदन में अन्य अधिकारियों के अलावा उक्त आरक्षक पर भी प्रताडि़त करने का आरोप लगाया था।

भोपाल : गोविंदपुरा थाने की छत से कूदकर सोमवार रात एक आरक्षक ने फरार होने का प्रयास किया। आरक्षक को पत्रकार राजेन्द्र सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। छत से कूदने के कारण उसके दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राजेन्द्र सिंह ने अपने सुसाइड नोट रूपी शिकायती आवेदन में अन्य अधिकारियों के अलावा उक्त आरक्षक पर भी प्रताडि़त करने का आरोप लगाया था।

पुलिस के मुताबिक, डीआरपी लाइन नेहरू नगर में पदस्थ आरक्षक मोहन सिंह ओड (40) निवासी गोपाल नगर, कुछ समय पहले गोविंदपुरा थाने में पदस्थ थे। पत्रकार राजेन्द्र सिंह की आत्महत्या मामले के बाद वह छुट्टी पर चले गए थे। बाद में उन्हें लाइन भेज दिया गया था। राजेन्द्र सिंह के सुसाइड नोट में आरक्षक मोहन सिंह का नाम भी है। सोमवार को उसे पूछताछ और बयान दर्ज करने के लिए गोविंदपुरा थाने बुलाया गया था।

रात करीब 11 बजे मोहन सिंह पेशाब करने के बहाने गोविंदपुरा थाने के भीतर सीढिय़ों से होते हुआ छत पर जा पहुंचा और वहां से भागने के प्रयास में नीचे छलांग लगा दी। घटना में उनके दोनों पैरों की एडिय़ों में गंभीर चोट आने के कारण वह वहीं बैठे रह गए। बाद में पुलिसकर्मियों की नजर पडऩे पर उन्हें पिपलानी स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। थाना प्रभारी पीके मिश्रा के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरक्षक मोहन सिंह को ऐसा आभास हो गया था कि उसे गिर तार कर लिया जाएगा। थाने के मुख्य द्वार पर संतरी तैनात थे, इसीलिए वह थाने के भीतर सीढिय़ों से होता हुआ छत पर जा पहुंचा और वहां से छलांग लगा दी। ऊंचाई अधिक न होने के कारण उसे अधिक चोटें नहीं आई हैं।

पत्रकार राजेन्द्र सिंह राजपूत ने विगत 10 अक्टूबर को डीजीपी नंदन दुबे को संबोधित करते हुए एक शिकायती आवेदन गोविंदपुरा थाने में दिया था। इसमें उन अधिकारियों व पुलिसकर्मियों के नाम का उल्लेख किया गया था जो उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताडि़त कर रहे थे। आवेदन में कहा गया था कि यदि आगामी 7 दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वह आत्महत्या कर लेंगे। विगत 15 अक्टूबर को राजेन्द्र सिंह ने मंत्रालय स्थित मुख्य सचिव के द तर के सामने सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट रूपी शिकायती आवेदन में गोविंदपुरा थाने की छत से कूदकर फरार होने का प्रयास करने वाले आरक्षक मोहन सिंह ओड के अलावा बिलखिरिया थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक महेन्द्र सिंह, जहांगीराबाद थाने में पदस्थ अजय कुमार, बैतूल में पदस्थ इंस्पेक्टर परमिंदर सिंह निरंकारी व रायसेन जिले में पदस्थ इंस्पेक्टर सुशील मजोका के नामों का उल्लेख किया गया है। हालांकि पुलिस इस बात से इनकार कर रही है कि पत्रकार राजेन्द्र ङ्क्षसह ने गोविंदपुरा में कोई शिकायती आवेदन दिया था। आईजी संजय कुमार झा ने एएसपी को निर्देश दिए हैं कि इस बात की जांच करें कि राजेन्द्र सिंह ने श्किायती आवेदन गोविंदपुरा पुलिस को दिया था अथवा नहीं। आत्महत्या के बाद अफसरों ने मोहन सिंह समेत महेन्द्र सिंह व अजय कुमार को लाइन भेज दिया था।

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