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नवेंदु के कुमाउनी कविता संग्रह ‘उघड़ी आंखोंक स्वींण’ का विमोचन

नैनीताल। प्रदेश की लोक संस्कृति के उन्नयन के लिए आयोजित पर्व-नैनीताल शरदोत्सव का मंच बृहस्पतिवार को कुमाउनी लोक भाशा के उन्नयन का मंच बना। इस दौरान नैनीताल क्लब स्थित शैले हॉल में प्रदेश के खादी, ग्रामोद्योग एवं सेवायोजन मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने डीएम अरविंद सिंह ह्यांकी, एडीएम प्रकाश चंद्र, स्थानीय विधायक सरिता आर्या, नगर पालिका अध्यक्ष श्याम नारायण तथा प्रदेश के लब्ध प्रतिश्ठ जनकवि बल्ली सिंह चीमा, डा. अतुल शर्मा, प्रो. देव सिंह पोखरिया, हीरा सिंह नेगी, दामोदर जोशी देवांशु एवं जहूर आलम आदि के साथ नवीन जोशी ‘नवेंदु’ के पहले कुमाउनी कविता संग्रह ‘उघड़ी आंखोंक स्वींण’ का विमोचन किया।

नैनीताल। प्रदेश की लोक संस्कृति के उन्नयन के लिए आयोजित पर्व-नैनीताल शरदोत्सव का मंच बृहस्पतिवार को कुमाउनी लोक भाशा के उन्नयन का मंच बना। इस दौरान नैनीताल क्लब स्थित शैले हॉल में प्रदेश के खादी, ग्रामोद्योग एवं सेवायोजन मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने डीएम अरविंद सिंह ह्यांकी, एडीएम प्रकाश चंद्र, स्थानीय विधायक सरिता आर्या, नगर पालिका अध्यक्ष श्याम नारायण तथा प्रदेश के लब्ध प्रतिश्ठ जनकवि बल्ली सिंह चीमा, डा. अतुल शर्मा, प्रो. देव सिंह पोखरिया, हीरा सिंह नेगी, दामोदर जोशी देवांशु एवं जहूर आलम आदि के साथ नवीन जोशी ‘नवेंदु’ के पहले कुमाउनी कविता संग्रह ‘उघड़ी आंखोंक स्वींण’ का विमोचन किया।

उल्लेखनीय है कि जोशी नैनीताल में राष्ट्रीय सहारा के ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत है। उनके कविता संग्रह में प्रदेश की लोक संस्कृति, सामाजिक सरोकारों, जीवन दर्शन, राजनीतिक प्रदूशण के साथ ही प्राकृतिक बिंबों को प्रदर्शित करती एवं वर्तमान हालातों की विशमताओं व विद्रूपताओं के बावजूद सकारात्मक सोच से आगे बढ़ने का संदेश देने वाली 114 कुमाउनीं कविताएं संग्रहीत हैं। इनमें तुकांत, लयबद्ध, गीत, गजल एवं आधुनिक जापानी हाइकू शैली की कविताएं भी शामिल हैं। दैनिक जीवन के बहुत छोटे तिनाड़ (तिनके), ढुड. (पत्थर), चिनांड़ (चिन्ह), सिंड़ुक (सींक), म्यर कुड़ (मेरा घर), अरड़ (ठंडा), रींड़ (ऋण) बुड़ बोट (बूढ़ा पेड़), बा्टक कुड़ (रास्ते का घर) व गाड़िकि रोड जैसे बिंबों के साथ ही राजअनीति, पहाड़ाक हाड़, इतिहास, पछ्याण (पहचान), बखत (समय), ज्यूनि अर मौत (जिंदगी और मौत), पनर अगस्ता्क दिन तथा घुम्तून हुं (पर्यटकों से अपील), बाग ऐगो, इंटरभ्यू में, गाड़ ऐ रै, हमा्र गौं में, परदेश जै बेर व मिं रूढ़िवादी भल (मैं रूंढ़िवादी ही ठीक) जैसी कविताएं मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों विशयों पर कटाक्ष करने के साथ ही इनसे उठने वाले सवाल उठाने के साथ उनके जवाब भी देती नजर आती है। साथ ही गहरे अंधेरे के बाद अवश्यमेव उजाला होने का विश्वास भी जगाती है।

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