: करोड़ों की हस्ती रखने वाले पूर्व मंत्री जनता से मांग रहे हैं भीख : अपनी हत्या की आशंका जताई : माया के अपने ही मंत्री अब उनके द्वारा बनाये गये दुर्ग को ढहाने का काम शुरू कर दिए हैं। इस की शुरुआत आज शाहजहांपुर के पिछड़ा वर्ग मंत्री पद से बर्खास्त अवधेश वर्मा ने माया की शुद्धि-बुद्धि के लिये हवन करवा कर किया और अपने समर्थकों की भारी भीड़ देख कर भावुक हो गये और दहाडे़ मार कर रोने लगे। जनता के बीच चुनाव लडुने के लिये रुपये मांगे। माया का मंत्रिमंडल अब एक-एक कर माया के खिलाफ बगावत करने लगा है। बगावत की शुरुआत की है शाहजहांपुर के अवधेश वर्मा ने। माया का यह मंत्री अपने समर्थकों के सामने फूट-फूट कर रो पड़ा।
यही मंत्री साहब अभी तक अपने क्षेत्र की जनता को रुलाया करते थे, वह आज खुद रो रहे हैं माया के डर से, यह भी कह रहे हैं कि चुनाव तक वह अपनी क्षेत्र की जनता के घर पर ही रूकेंगे और वहीं खाना खयेंगे। अनका आरोप है कि उन की हत्या भी करराई जा सकती। अभी तक जनता को लूटने में मशगूल मंत्री जी आज खुद जनता से भीख मांग रहे हैं। इस से साफ दिख रहा है कि मंत्री
महोदय जनता से लूटे गये धन को छिपाने का नया जरिया ढूंढ लिया है। ताकि उन पर लोकायुक्त का चाबुक न चल सके।
बर्खास्तगी के बाद मिनिस्टर साहब आज पहली बार जनता के सामने आए और जनता के बीच पहुंचते ही उन्होंने दहाडे़ मार कर रोना शुरू कर दिया। अवधेश कुमार वर्मा शाहजहांपुर की ददरौल विधान सभा से दो बार विधायक बने और 2007 प्रदेश में पिछड़ा वर्ग राज्य मन्त्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। माया ने अवधेश वर्मा को तमाम आरोप लगाकर मन्त्री पद से बर्खास्त कर दिया था, उसके बाद से मन्त्री जी आज पहली बार अपने घर पर यज्ञ किया। इस दौरान उनके सैंकड़ों समर्थक मौजूद थे। बाद जैसे ही वो अपने समर्थकों के बीच में पहुंचे। वैसे उन्होंने दहाड़े मारना शुरू कर दिया। वो रो-रो कर बस यही कह रहे थे कि आखिर उनका कुसूर क्या था, जो बसपा ने उन्हें बर्खास्त कर दिया। मन्त्री जी को रोता देख उनके दर्जनों समर्थक भी उनके साथ रो पड़े।
शायद मंत्री महोदय पंचायत चुनाव में अपने द्वारा की गई गुंडई भूल गये हैं। चुनाव के ठीक पहले मायावती ने शाहजहांपुर में पिछडा वर्ग कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अवधेश वर्मा की करतूतों पर नजर टेढी की और उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाते हुये टिकट भी काट दिया तो उन्हें अब जनता की याद आने लगी है। पुवायॉ के विधायक धीरेन्द्र प्रसाद को ब्लाक प्रमुख के चुनाव में पुवायॉ से अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार की खिलाफत महंगी पड़ी। धीरेन्द्र को पुवायॉ, सिधौंली, बण्डा और खुटार में ब्लाक प्रमुख चुनाव में अपने ही पार्टी के एक बडे़ नेता के करीबियों की खिलाफत मंहगी पड़ी और टिकट से हाथ धोना पड़ा।
आज रोने वाले अवधेश वर्मा की गुंडई की हद तो पंचायत चुनाव में खुल कर सामने आई, जब अपने परिवार और रिश्तेदारों को ब्लाक प्रमुख बनाने के लिये प्रत्याशियों का अपहरण कराने के आरोप लगे। पहले मामले में तो अपने भाई को बीडीसी सदस्य बनाने के लिये अवधेश वर्मा ने बीडीसी प्रत्याशी के भाई के अपहरण में सरकारी गाड़ी का दुरुयोग किया, जिस में पुलिस ने भारी दवाव में अवधेश वर्मा के भाई के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बसपा ने बहादुर लाल आजाद को अपना प्रत्याशी बनाया। बहादुर लाल आजाद के गांव एवं नगर दोनों जगह से वोट होने और पहचान पत्र होने के कारण इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस में अवधेश वर्मा को लगने लगा कि बहादुर लाल के खिलाफ आदेश हो सकता है तो पुलिस की सहायता से अवधेश ने याचिकाकर्ता को ही उस के घर से जबरदस्ती उठबा लिया था। इस घटना के बाद याचिकाकर्ता के भाई ने अवधेश वर्मा के खिलाफ पुलिस अधीक्षक को भाई के अपहरण की सूचना दी थी।
अवधेश वर्मा के दबाव में याचिकाकर्ता से एक शपथ-पत्र जिलाधिकारी शाहजहांपुर को दिलाया, जिस में याचिकाकर्ता ने कहा कि उस ने किसी तरह की कोई याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में नहीं दाखिल की है, जिस के बाद जिलाधिकारी ने यही रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेज दी, जिस से वह याचिका निरस्त कर दी गई। इसी मामले की जानकारी करने के लिये एक खबरिया चैनल के पत्रकार ने जब अवधेश वर्मा से फोन पर उन पर लग रहे आरोपों के बारे में सत्यता जानने के लिये बात की तो पहले तो अवधेश वर्मा ठीक से बात करते रहे पर एकाएक वह उस पत्रकार पर हमलावर हो गये और कहा कि आप हमारी इस से पहले भी कई बार रील धो चुके हैं, इस बार यदि आप ने हमारे खिलाफ खबर दिखाई या अपने चैनल पर पट्टी चलाई तो हम आप के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा देंगे।
हद तो 20 दिसम्बर 2010 को तब हो गई, जब अवधेश वर्मा ने मंत्री पद की मर्यादा को भूलते हुये अपने रिश्तेदार को ददरौल ब्लाक से निर्विरोध ब्लाक प्रमुख बनवाने के लिये पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में अपने गनर और जिले के हिस्ट्रीशीटर अनिल घुरई, मोहसिन, बार्डर, बहादुर लाल आजाद और नगर विधानसभा से बसपा के प्रत्याशी असलम खां के साथ मिल कर ब्लाक प्रमुख पद के प्रत्याशी दिनेश पाल सिंह (मुन्ना) के प्रस्तावक स्वतंत्र देव को ब्लाक परिसर से अपहृत कर ले गये थे। अवधेश वर्मा की इस गुंडई की कहानी खबरिया चैनलों के कैमरे में कैद हो रही है, इस का भी धयान नहीं दिया। जब कैमरे में
अपनी करतूत कैद होने की भनक लगी तो अवधेश वर्मा ने अपने गुर्गों से खबरिया चैनलों के पत्रकारों को पकड़ने का आदेश दे दिया। एक खबरिया चैनल के पत्रकार को मंत्री के गुर्गों ने पकड़ लिया और उस के साथ हाथापाई की और उस के कैमरे से कैसेट निकाल ली। फिर हिदायत देते हुए छोड़ा। एक पत्रकार वहां से अपनी जान बचाकर खेतों के रास्ते से भागने में सफल हो गया। उस समय कई खबरिया चैनलों ने मंत्री की गुंडई की कहानी दिखाई पर मयावती अपने मंत्री का बचाव करती रही।
शायद मंत्री जी को यह पता नहीं है कि जनता सब जानती है। वह अब मंत्री के घडि़याली आंसू देख कर पिघलने वाली नहीं है। मंत्री
जी आप ने कहा कि मोटर साइकिल से बसपा पार्टी को मजबूत किया। दस सालों में आप के पास अथाह दौलत कहां से आ गई इस का जबाव भी जनता मांग रही है। पांच साल जनता को रुलाने के बाद अब रोने का कितना फायदा होगा यह तो चार मार्च को ही पता चल पाएगा। पर तब तक यह देखना भी दिलचस्प होगा कि क्या जनता अगले पांच साल रोने को तैयार है?
लेखक सौरभ दीक्षित शाहजहांपुर में इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार हैं.





