वरिष्ठ पत्रकार सतीश के. सिंह ने सहारा और चैनल वन में जाने संबंधी भड़ास पर प्रकाशित खबरों को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि पहले मुझे सहारा में ज्वाइन किया बताया गया और अब चैनल वन में ज्वायनिंग के संबंध में खबर भड़ास पर प्रकाशित हुई है. ये दोनों ही खबरें गलत हैं.
उन्होंने कहा कि भड़ास को अपनी विश्वसनीयता बचाकर रखने का प्रयास करना चाहिए. अगर भड़ास किसी एजेंडे के तहत मेरे खिलाफ अनाप-शनाप खबरें छाप रहा है तो फिर कोई बात नहीं. अगर ऐसा नहीं है तो खबर देने से पहले एक बार जांच-पड़ताल करने की कोशिश करनी चाहिए और जिसके बारे में खबर हो उसका पक्ष ले लेना चाहिए. इन्हीं खबरों में बताया गया है कि मैं पीएमओ का करीबी हूं जबतक सच्चाई है कि मुझे पीएमओ का रास्ता तक नहीं पता है. इस प्रकार की अनाप-शनाप बातें प्रकाशित करने से छवि पर बुरा प्रभाव पड़ता है. सतीश के. सिंह के मुताबिक वे न तो सहारा ज्वाइन कर रहे हैं और न ही चैनल वन जा रहे हैं. उनके बारे में कायस लगाने और अफवाह फैलाने पर विराम लगाना चाहिए.
(उपरोक्त बातें सतीश के. सिंह ने भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह से फोन पर कहीं. इस बारे में भड़ास के एडिटर यशवंत कहना है कि कानाफूसी कैटगरी में संपादकों से संबंधित गासिप का प्रकाशन होता रहता है. बड़े न्यूज चैनलों के संपादकों या पूर्व संपादकों की गतिविधियों के बारे में चर्चा, गासिप प्रकाशित करना अपराध नहीं है. और, यह जरूरी भी नहीं कि हर कयास जो छपे वो सच साबित हो जाए. कई बार ऐसा होता है, जिसकी संभावना व्यक्त की जाती है, वह सच साबित होता है. कई बार अंदाजा गलत भी हो जाता है. ये सूचनाएं, गासिप, खबरें मीडिया इंडस्ट्री के विश्वसनीय लोगों से मिलती हैं. ऐसे में जब कानाफूसी होगी तो छपेगी भी. न्यू मीडिया के इस दौर में संपादक, चैनल और अखबार भी खबर के हिस्से हैं. हां, इन लोगों को यह खराब जरूर लगता है कि आखिर देश दुनिया की खबर लेने वालों की खबर भला दूसरा कौन व कैसे ले सकता है. पर अब ये सच है. इस ट्रेंड को भड़ास ने न सिर्फ इस्टैबलिश किया बल्कि इसे एक बड़े आंदोलन का रूप दे दिया जिसके कारण आज दर्जन भर मीडिया वेबसाइट संचालित हो रही हैं और सभी खबर देने वालों की खबर लेने में लगी हैं. इसी प्रक्रिया से मीडिया का लोकतांत्रीकरण होगा. भड़ास ने मीडिया की खबर देने के एवज में न सिर्फ भुगता है बल्कि घाघ, बेइमान और दलाल टाइप संपादकों व मीडिया मालिकों की साजिशों का शिकार भी हुआ है. बावजूद इसके, न तो हमारा हौसला कम हुआ है और न ही इरादा डिगा है. दूसरों के बारे में अनाप शनाप आंय बांय सांय खबरें दिखाने छापने चलाने दिखाने बताने वालों को कभी कभी अपने बारे में भी खबर सुनने पढ़ने देखने के लिए तैयार रहना चाहिए. हां, हम सतीश के. सिंह जी के इस लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करते हैं जिसके तहत वह खुद के बारे में प्रकाशित किसी खबर पर अपना पक्ष दे सकें और गलत तथ्यों को दुरुस्त कराने की कोशिश कर सकें. भड़ास ने हमेशा खबरों-घटनाओं के दूसरे तीसरे चौथे समेत हर एक पक्ष को सामने लाने का काम किया है और आगे भी करेंगे.)





