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छह साल से जेल में बंद एक सज्जन ने चार सौ पन्नों का उपन्यास लिखा

यशवंत सिंह जी, आपकी पुस्तक 'जानेमन जेल' पढ़ी, अच्छी लगी. आँखों के सामने जेल का वातावरण जैसे सचित्र खड़ा हो गया. आपकी सकारात्मक सोच ने प्रभावित किया। एक और सज्जन हैं, जो फिलहाल 6 वर्षों से जेल में हैं, जिन्होंने जेल में रह कर इसी तरह की सकारात्मक सोच के साथ अंग्रेजी का 400 पन्नों का उपन्यास लिखा है जो अभी प्रकाशित नहीं हुआ है, शायद इस वर्ष के अंत तक छप जाए.

यशवंत सिंह जी, आपकी पुस्तक 'जानेमन जेल' पढ़ी, अच्छी लगी. आँखों के सामने जेल का वातावरण जैसे सचित्र खड़ा हो गया. आपकी सकारात्मक सोच ने प्रभावित किया। एक और सज्जन हैं, जो फिलहाल 6 वर्षों से जेल में हैं, जिन्होंने जेल में रह कर इसी तरह की सकारात्मक सोच के साथ अंग्रेजी का 400 पन्नों का उपन्यास लिखा है जो अभी प्रकाशित नहीं हुआ है, शायद इस वर्ष के अंत तक छप जाए.

आपके उपन्यास के शुरू के अंश, जिनमें जेल सम्बन्धी तथ्य बताए गए हैं, उन्होंने विस्तार से लिखे हैं. यदि आपकी जानकारी में हों तो कृपया मुझे जेल जीवन पर किन्हीं के भी द्वारा लिखी गई अन्य पुस्तकों के नाम बताएं, हिन्दी अंग्रेजी दोनों में, राजनेताओं को छोड़ कर. दूसरे, एक जानकारी और दें, आपने बाहर आकर लिखा, क्या जेल में रहते हुए किताब लिख और छपवा सकते हैं? क्या इसके लिए जेल अथौरिटी से अनुमति लेनी पड़ती है?

उत्तर दें.

धन्यवाद।

मणिका मोहिनी

[email protected]
 


मणिका जी

शुक्रिया, आपको मेरा लिखा पसंद आया. साथ ही 'जानेमन जेल' किताब खरीद कर पढ़ने के लिए आपका आभार. मैं जानना चाहूंगा कि वो कौन सज्जन हैं जो जेल में छह साल से बंद हैं और चार सौ पन्नों का जेल जीवन पर उपन्यास लिखा है. मैं उनसे निजी तौर पर मिलना भी चाहूंगा. कृपया बताइएगा.

आपने पूछा है कि जेल जीवन पर लिखी गई अन्य किताबों के बारे में तो मुझे कोई खास आइडिया नहीं है. हां, अरुण फरेरा नामक एक साथी की जेल डायरी को हम लोगों ने भड़ास पर जरूर प्रकाशित किया था. उसका लिंक दे रहा हूं. आप पढ़िएगा.

http://bhadas4media.com/vividh/6531-2012-11-03-11-53-08.html

http://bhadas4media.com/vividh/6532-2012-11-03-12-05-32.html

मैंने जेल जीवन पर लिखी गई किताबों का पता करने में इसलिए वक्त नहीं गंवाया क्योंकि एक थीम पर प्रकाशित कोई किताब पढ़ लेने के बाद ये खतरा बना रहता है कि जब आप उस पर अपना कुछ लिखें तो पढ़ी गई किताब के बिंब, कथ्य, शैली आदि की छाप पड़ जाए. इसी कारण पहले मैंने अपना हाल बयान किया और उसे प्रकाशित कराया. 'जानेमन जेल पार्ट दो' जब लिख लूंगा तो जेल जीवन पर लिखी गई अन्य किताबों को तलाशूंगा, पढ़ूंगा.

जेल में रहते हुए किताब लिख सकते हैं लेकिन जाहिर है, जब आप जेल में हैं तो जेल प्रशासन के अधीन हैं. आप जो भी वहां लिखेंगे, उसे जेल प्रशासन को दिखाना पड़ सकता है या उनकी अनुमति लेकर लिख पाएंगे. हां, जब आप जेल से बाहर आ गए तो कुछ भी लिखने के लिए आजाद हैं.

आभार
यशवंत

[email protected]


'जानेमन जेल' किताब घर बैठे मंगाने के लिए आप किताब का नाम, अपना नाम, पूरा पता पिन कोड सहित और अपना मोबाइल नंबर लिखकर 09873734046 पर SMS कर दें. किताब कुछ ही दिनों में आपके हाथ में होगी. मूल्य सौ रुपये से कम है और छूट के साथ उपलब्ध है.
 


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