उत्तर प्रदेश के विभिन्न सरकारी महकमों में बंपर भर्तियों की प्रक्रिया जारी है, जिसमें शिक्षा व पुलिस विभाग प्रमुख हैं. फिलहाल शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों व उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान व गणित शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है. ऐसे में यूपी सरकार की अखबारों को विज्ञापन देने की गलत नीति के कारण तीन प्रमुख अखबारों की चांदी कट रही है. लेकिन, यूपी के खजाने से पैसे की बेवजह बर्बादी हो रही है जो कि आम आदमी के खून पसीने की गाढ़ी कमाई में से कुछ अंश टैक्स के रूप हासिल कर जमा किया जाता है.
असलियत में मामला यह है कि यूपी की सपा सरकार द्वारा शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाले जा रहे हैं, जिसके आवदेनों को ऑनलाइऩ मंगाया गया है. ऑनलाइन आवेदनों के लिए सरकार ने एक अलग से वेबसाइट भी चला रखी है. इस पूरी प्रक्रिया में गलत नीति यह है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अपने जिले में अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करने के लिए अखबारों में विज्ञापन दिए जा रहे हैं. विज्ञापन करीब दो कॉलम से लेकर ढाई कॉलम तक का होता है. सभी जिलों के विज्ञापनों में रिक्तियों की संख्या के अतिरिक्त सभी कुछ एक जैसा है. प्रदेश में 71 जिले हैं. एक ही बात को प्रदेश भर में 71 बार कहने के लिए तीनों अखबारों को 71-71 विज्ञापन मिल रहे हैं. एक विज्ञापन को प्रदेश भर में प्रकाशित किया जा रहा है. विज्ञापन प्रदेश के तीन समाचार पत्रों दैनिक जागरण, अमर उजाला व हिदुस्तान में प्रकाशित किए जा रहे हैं. तो ऐसे में प्रदेश की खराब विज्ञापन नीति का लाभ भी यही तीनों अखबार उठा रहे हैं.
इस मामले में प्रत्येक जिले से प्रदेश भर में तीन से चार बार विज्ञापन प्रकाशित किये जायेंगे. अभी ऑनलाइन आवेदन का विज्ञापन, फिर कट ऑफ लिस्ट का विज्ञापन प्रत्येक जिले द्वारा प्रदेश भर में अलग-अलग प्रकाशित करवाया जायेगा. ऐसे ही दूसरी कट ऑफ लिस्ट का विज्ञापन, फिर तीसरी का शायद चौथी कट ऑफ लिस्ट की भी आवश्यकता पड़ जाये, क्योंकि एक-एक अभ्यर्थी ने तीस-तीस, चालीस-चालीस जिलों में आवेदन किया है. मालूम यह भी पड़ा है कि कुछ धुरंधर अभ्यर्थियों ने सभी 71 जिलों में आवदेन कर दिया है.
होना यह चाहिए था कि प्रदेश के शिक्षा सचिव द्वारा प्रदेश के तीनों प्रमुख अखबारों में जिलेवार रिक्तियों की सूची देते हुए आवश्यक सूचना के साथ ऑनलाइन आवेदन के लिए केवल एक विज्ञापन प्रकाशित करवाना चाहिए था. इसी प्रकार वेबसाइट पर पहली, दूसरी या शायद तीसरी, चौथी कट ऑफ लिस्ट जारी होने की सूचना के एक-एक विज्ञापन सभी अखबारों में प्रकाशित करवाने चाहिए थे.
हो सकता है सपा के कर्ता-धर्ता सोच रहे हो कि विज्ञापन के जरिए अखबारों को ऑब्लाइज किया जा सके ताकि जारी छीछालेदर को कम किया जा सके. वैसे सपा सरकार का शिक्षा विभाग में भर्ती प्रक्रिया शुरु करने के लिए तहेदिल से शुक्रिया अदा तो किया ही जाना चाहिए. चलो इस बहाने अखबारों की भी कमाई हो गई. अखबार वाले भी खुश, अभ्यर्थी भी खुश, शायद सरकार भी अपनी पीठ खुद ठोककर खुश हो रही होगी. सभी खुश. सभी की चांदी.
आशीष कुमार कुमार पत्रकारिता एवं जनसंचार में शोध कर रहे हैं. इनसे 09411400108 पर संपर्क किया जा सकता है.