सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में पीआईएल दायर करते ही मंत्री तथा जल निगम के अध्यक्ष आज़म खान ने अपना विधिविरुद्ध आदेश तत्काल वापस ले लिया. डॉ ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा था कि उ०प्र० जल निगम उत्तर प्रदेश जल आपूर्ति एवं सीवरेज अधिनियम 1975 की धारा 7(3) के अनुसार अध्यक्ष का पद लाभ का पद नहीं माना जाएगा और उसका निगम के किसी प्रबंधकीय कार्य पर कोई अधिकार नहीं होगा, लेकिन इसके बावजूद श्री खान ने अपने हस्ताक्षर से 28 अगस्त 2012 को एक कार्यालय ज्ञाप जारी कर सारे प्रबंधकीय अधिकार स्वयं ले लिए थे.
अतः उन्होंने श्री खान को इस पद से हटाये जाने और 28 अगस्त 2012 के आदेश को निरस्त किये जाने की मांग की थी. आज यह मामला जस्टिस इम्तियाज़ मुर्तजा और जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की बेंच के सामने सुनवाई पर आते ही जल निगम के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कल 29 अक्टूबर को ए के मित्तल, एमडी, जल निगम के हस्ताक्षर से यह विवादित आदेश वापस ले लिया गया है. इसके बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है.





