रेवाड़ी। खुद को 'जननेता' कहने वाले शहर के नेता ने दिवाली के तोहके के नाम पर कई पत्रकारों के पेट में दर्द कर दिया। इस कथित जननेता की ओर से कुछ राष्ट्रीय समाचार पत्रों के पत्रकारों को जहां महंगे गिफ्ट भेजे, तो छोटे या साप्ताहिक समाचार पत्रों के पत्रकारों को सिर्फ गोंद के लड्डू ही नसीब हो पाए। जब ऐसे पत्रकारों को गिफ्ट की जानकारी मिली, तो उन्होंने लड्डू लौटाने की बात कही। कुछ पत्रकार स्वाद चखने के कारण यह काम भी नहीं कर पाए।
हाल ही में इस नेता की ओर से दिवाली पर्व के ताहफे के रूप में जहां अधिक प्रसार संख्या वाले पत्रकारों को मोटे गिफ्ट और मिठाई के डिब्बे भेजे, तो कुछ को सिर्फ गोंद के लड्डुओं के डिब्बे। इस काम को करने के लिए एक को नियुक्त किया गया। जब आम पत्रकारों तक लड्डुओं के डिब्बे पहुंचे, तो उन्होंने उनका स्वाद चखना शुरू कर दिया। जब चार-चार लड्डुओं वाले डिब्बों की मिठाई खत्म हो गई, तो उन्हें पता चला कि उनके साथ गिफ्ट के नाम पर भेदभाव किया गया है।
बस इस बात का पता चलते ही कई पत्रकारों ने नेता को फोन करने शुरू कर दिए। लड्डुओं के डिब्बे भी वापस पहुंचाने की धमकी देने लगे, लेकिन अधिकांश इन लड्डुओं को पहले ही डकार चुके थे। कई पत्रकार एक-दूसरे के पास फोन करके अपनी-अपनी भड़ास निकालने लगे। जब ऐसे पत्रकारों ने नेता से संपर्क किया, तो उसने उन्हें बताया कि गिफ्ट बांटने वाले व्यक्ति का भेजा दोपहर के समय खराब हो जाता है, इसलिए उसने भेदभाव कर दिया। उसने उलाहना देने वाले पत्रकारों को यह आश्वासन भी दिया कि उन्हें बाद में गिफ्ट मिल जाएगी। नेता की इस करतूत के कारण कई पत्रकारों को दस्त लगे हुए हैं। चर्चा यही है कि लड्डू से हुआ फूड प्वायजनिंग अपना काम कर रहा है। बिना गिफ्ट का डिब्बा लगातार उन्हें परेशान कर रहा है। (कानाफूसी)






