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दीपक चौरसिया पर ईंट के बाद पत्थर पड़े

इंडिया न्यूज के भले अच्छे दिन आ गए हों लेकिन लगता है दीपक चौरसिया के बुरे दिन शुरू हो गए हैं. इंडिया न्यूज उनके लिए निजी तौर पर काफी झटके देने वाला प्रोजेक्ट साबित हो रहा है. पहले उनकी टांग टूटी. दो-दो बार आपरेशन हुआ. आखिरकार जब ठीक हुए तो पहले जैसे न बन पाए. अब वो लंगड़ा कर चलने लगे हैं. इंडिया न्यूज को टीआरपी दिलाने के जुनून में पहले आम आदमी पार्टी और केजरीवाल, फिर आसाराम के पीछे पड़ गए. टीआरपी तो मिली लेकिन दीपक के ढेरों दुश्मन और विरोधी पैदा हो गए. आप वालों से लेकर आसाराम वालों तक ने दीपक चौरसिया के खिलाफ कई तरह की मुहिम सोशल मीडिया पर शुरू कर दी है जिसमें दीपक चौरसिया के करप्शन की फाइल खोल दी गई है. फिर जब वो चुनावी शो करने फील्ड में उतरे तो पहले उन पर ईंट पड़े, अब पत्थर पड़ने की सूचना आई है.

इंडिया न्यूज के भले अच्छे दिन आ गए हों लेकिन लगता है दीपक चौरसिया के बुरे दिन शुरू हो गए हैं. इंडिया न्यूज उनके लिए निजी तौर पर काफी झटके देने वाला प्रोजेक्ट साबित हो रहा है. पहले उनकी टांग टूटी. दो-दो बार आपरेशन हुआ. आखिरकार जब ठीक हुए तो पहले जैसे न बन पाए. अब वो लंगड़ा कर चलने लगे हैं. इंडिया न्यूज को टीआरपी दिलाने के जुनून में पहले आम आदमी पार्टी और केजरीवाल, फिर आसाराम के पीछे पड़ गए. टीआरपी तो मिली लेकिन दीपक के ढेरों दुश्मन और विरोधी पैदा हो गए. आप वालों से लेकर आसाराम वालों तक ने दीपक चौरसिया के खिलाफ कई तरह की मुहिम सोशल मीडिया पर शुरू कर दी है जिसमें दीपक चौरसिया के करप्शन की फाइल खोल दी गई है. फिर जब वो चुनावी शो करने फील्ड में उतरे तो पहले उन पर ईंट पड़े, अब पत्थर पड़ने की सूचना आई है.

बताया जाता है कि बुधवार छत्तीसगढ़ के दुर्ग इलाके में दीपक चौरसिया की गाड़ी पर पत्थर फेंके गए. दीपक अपना चुनावी शो खत्म कर अपनी कार बैठ रहे थे. तभी कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी में घुसने की कोशिश की. दीपक के बाउंसर्स ने उन्हें ऐसा करने से रोका. तब करीब पांच लोगों ने दीपक चौरसिया की गाड़ी पर पत्थर फेंके. दीपक को चोट तो नहीं आई पर कार के शीशे टूट गए हैं. एक हमलावर पकड़ लिया गया है. पुलिस जांच में जुट गई है.

कहा जा रहा है कि दीपक चौरसिया की आगे की जिंदगी अब स्मूथ नहीं रही. वे पहले जैसे बेखौफ फील्ड रिपोर्टिंग नहीं कर पाएंगे. उन्होंने अगर आम आदमी पार्टी और आसाराम एंड कंपनी का मीडिया ट्रायल कर अपनी टीआरपी बढ़ाई है तो अपनी निजी ज़िंदगी और फील्ड की आजादी खोई है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ये मनहूस इंडिया न्यूज चैनल का साया है कि जो भी एडिटर यहां आता है, उसकी परसनल लाइफ बिगड़ने लगती है और उसे तरह-तरह से परेशान होना पड़ता है. तो क्या माना जाए, जेसिका लाल की आत्मा विनोद शर्मा एंड फेमिली के साथ-साथ यहां कार्यरत संपादकों से भी तरह-तरह से तरीके-तरीके से बदला लेती है?  कोई दीपक चौरसिया के दिल से पूछे. उन्हें अब अपने आगे पीछे कई बाउंसर रखने पड़ रहे हैं. मतलब, अब दीपक का फील्ड का करियर खत्म. सिर्फ स्टूडियो से डिबेट करेंगे-कराएंगे.

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