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पीके तिवारी और पुलिस ने बहुत कोशिश की पर महुआ न्यूजरूम से बाहर नहीं निकले आंदोलनकारी

Yashwant Singh : महुआ पर प्रदर्शन का एक नतीजा हुआ कि महुआ का मालिक पीके तिवारी पुलिस वालों को पैसा देकर ले आया, बकाया सेलरी के लिए हड़ताल कर रहे कर्मियों को बाहर निकालने के लिए… लेकिन उसका दांव उल्टा पड़ गया… महुआ के साथियों का फोन आते ही इतनी जगह रायता बिखेरा गया कि पुलिस डांट सुनकर उल्टे पांव वापस लौट गई और एक मजिस्ट्रेट आया हड़ताली कर्मियों का बयान लेने.. लेकिन सबका टोन कर्मियों के खिलाफ था… जैसे लग रहा था कि कर्मियों को आफिस से बाहर नहीं निकालेंगे तो जाने क्या हो जाएगा…

Yashwant Singh : महुआ पर प्रदर्शन का एक नतीजा हुआ कि महुआ का मालिक पीके तिवारी पुलिस वालों को पैसा देकर ले आया, बकाया सेलरी के लिए हड़ताल कर रहे कर्मियों को बाहर निकालने के लिए… लेकिन उसका दांव उल्टा पड़ गया… महुआ के साथियों का फोन आते ही इतनी जगह रायता बिखेरा गया कि पुलिस डांट सुनकर उल्टे पांव वापस लौट गई और एक मजिस्ट्रेट आया हड़ताली कर्मियों का बयान लेने.. लेकिन सबका टोन कर्मियों के खिलाफ था… जैसे लग रहा था कि कर्मियों को आफिस से बाहर नहीं निकालेंगे तो जाने क्या हो जाएगा…

सच में, आज मैं सोच सोच कर उफनता रहा कि किस दौर में जी रहे हैं हम.. काहे का लोकतंत्र और काहे का न्याय… सब कुछ बिका हुआ है…. और सब कुछ बड़े लोगों के लिए है… खैर, लखनऊ से लेकर नोएडा तक के बड़े लोगों को फोन खड़खड़ाने और गुहार लगाने का नतीजा ये निकला कि महुआ का मालिक पीके तिवारी सेलरी देने के लिए तैयार हो गया है पर आधा अधूरा.. मेरे महुआ आफिस में जमे हड़ताली मीडियाकर्मियों से अनुरोध है कि वो धैर्य न खोएं… आज शाम तक अंजाम अच्छा होना चाहिए… ऐसा न हुआ तो दिवाली के दिन हम लोग बड़े पैमाने पर पहुंच रहे हैं… और, कोशिश ये भी है कि ये महुआ का मालिक पीके तिवारी दुबारा जेल जाए, चार सौ बीसी से लेकर करप्शन और हवाला समेत कई मामलों में..

मुझे पता है कि इन लोगों ने महुआ आफिस की बिजली पानी आदि की सप्लाई काट दी है लेकिन मुश्किल के इस वक्त के बाद सुख के क्षण आएंगे.. महुआ आफिस के साथियों, आप डटे रहना.. हम लोग लगे हुए हैं.. इस जड़, दुष्ट और जन विरोधी तंत्र के बीच अगर कुछ कड़ियां जिंदा और जन समर्थक हैं तो उन्हें हम तलाश रहे हैं और उनके दरवाजे खड़खड़ा रहे हैं… लेकिन एक चीज तो आज समझ में ठीक से आ गई कि आखिर क्यों कोई नक्सलवादी होता है….

    Devendra Surjan लगे रहिये.
 
    राय संजय p.k.t ——– pee ke talli nam acha hai na ….p.k. tiwari ka
 
    Aashish Jain Aashu Sangharshon ke andheron se sukh ka ujala aayega… hum itni door sahi par har pal aapke sath hain aur eeshwar se prarthna bhi hai aise gande logon ko sadbuddhi de,,
    
    राय संजय to kya lohiya bhi naxali thye ..unhone kaha jab hamara haq koee na de to cheen ke lena jayaj hai ……main isko naxlism ka nam nahin dena chata bhaee …..maf kijiyega …….mere in doston ki ladaee main main insabhi ka dil se sath deta hun …….inke sath hun …..
     
    Ankit Agrawal Mahua ka malik kab tak sabko mahua pilayega!
     
    Anupam Gautam pargya bhi isile bnd hua or band bjgyi..
     
    Suresh Gandhi mahuaa krmchario k sanghrsh v mehnt rang laya..sabhi k Diwali ki shubhkamnae..
     
    Narendra Mishra Aapka Diya housla Media karmiyon k liye.. 1 mishaal kaayam hoga.. Badhaai Aapko.. Sir G.
     
    Harish Singh Good
     
    Madan Tiwary इसके साथ हीं एक केस भी लेबर कोर्ट मे कर दे। चिंता न करे वहां से नही तो लेबर ट्रिब्यूनल से न्याय हर हाल मे मिलेगा।
     
    Dharmendra Gupta thumbs up….
     
    Munna Lal Good morning S.Varma ji krodh me nirny aur khushi me vardan dono ke parinam jyada tr achchhe nhi hote .
 
    Girish Mishra What is the connection of Manoj Tiwari with Mahua?
 
    पवन सिंह यादव लेकिन एक चीज तो आज समझ में ठीक से आ गई कि आखिर क्यों कोई नक्सलवादी होता है….
    
    Pankaj Kumar किस दौर में जी रहे हैं हम.. काहे का लोकतंत्र और काहे का न्याय… सब कुछ बिका हुआ है…. और सब कुछ बड़े लोगों के लिए है… सौ फीसदी सच्ची बात …………!
    
    दीक्षित आशीष सागर आपको इस अभियान कि अगुवाई के लिए शुभ कामना – हल्ला बोल
     
    Acharya Sushil Gangwar शुभ कामना
     
    Akhilesh Krishna Mohan यशवंत जी आखिर देर से ही सही आपको पता तो चल ही गया होगा जब नोयडा में मीडिया कर्मियों के साथ ऐसा हो रहा है तो पूरे देश में कैसी दबंगई गुंडागर्दी होती होगी। पिछले साल यूपी न्यूज़ चैनल में भी ऐसा ही हुआ था। गोपाल कांडा जेल में था। और मीडिया कर्मियों पर हरियाणा न्यूज़ का जोशी बिना पैसे दिए बाहर निकाल रहा था। और विवेक अवस्थी ने जो उस समय के न्यूज़ डायरेक्टर थे ने भी चैनल आना छोड़ दिया। मैं भी उन्हीं पत्रकारों में से था लेकिन करीब 30 मीडिया कर्मियों को केवल बकाया सैलरी लेकर संतोष करना पड़ा । तो हालात ऐसे ही हैं। मनरेगा में मजदूरी करने के बाद भी मजदूरी नहीं मिल रही है। ऐसे सैकड़ों मामले हैं लेकिन पीड़ित हमेशा कमजोर ही होता है। नहीं ले पाता है। कोई साथ भी नहीं देता है। लेकिन पत्रकारों के अधिकारों को लेकर यशवंत जी आपकी मुहिम जो बीते एक साल से देखने को मिली है वह लाजवाब है। अगर आपके साथ ऐसा नहीं हुआ होता तो आप के अंदर इस तरह के क्रांतिकारी विचार नहीं आते। नमस्कार, यशवंत जी आपको भी और पूरी भड़ास टीम को हैप्पी दीवाली।
     
    Santosh Choudhary  हल्ला बोल।
     
   शिवानन्द द्विवेदी सहर हल्ला बोल
     
    Smita Mishra aap me bahut initiative hai…
 
    Harish Sharma दीपों के इस त्यौहार पर मेरी तरफ से आप सभी को दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाएँ …..
 
    Yashwant Singh kolkata se v dhokha dhadi kar k wo aur uska bap s b tiwari vaga hai
 
    Prakash Bhushan Singh In Solidarity..
 
    Ranjan Pandit Mujhe sun kar dukh hua. Bhai aap sabhi se aagrah hai ki aap date rahe aapke saath insaf hoga. Hamari subhkamana aapke saath hai. . .
   
    Vinod Bhaskar नक्सलवाद समस्या पर ये विचार काफ़ी पहले व्यक्त कर चुका हूं.
    
    Chandrabhan Yadav sawal naxalwad ka nahi?? balki sawal naxalwadi babane ki prakriya ka hai……

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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