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‘खबर भारती’ में भी सेलरी के लिए संघर्ष शुरू, पूर्व कर्मचारियों ने थाने में की लिखित शिकायत

भोपाल : साईं प्रकाश टेलीकम्यूनिकेशन जो कि मूल रूप से एक चिटफंड कंपनी है, मध्यप्रदेश छत्तीसगढ में 'ख़बर भारती' के नाम से रीजनल चैनल संचालित करती है. इस कंपनी के कई पूर्व कर्मचारी कंपनी की लगातार वादाखिलाफी के खिलाफ थाने पहुंच गये हैं. कंपनी ने कर्मचारियों को रिलीव तो कर दिया लेकिन दो से 6 महीने तक की बकाया सैलरी, समेत अन्य भत्ते और पीएफ, नोडयूज़ नहीं दिया. इससे परेशान होकर अब कर्मचारियों ने पुलिस का रूख कर लिया है.

भोपाल : साईं प्रकाश टेलीकम्यूनिकेशन जो कि मूल रूप से एक चिटफंड कंपनी है, मध्यप्रदेश छत्तीसगढ में 'ख़बर भारती' के नाम से रीजनल चैनल संचालित करती है. इस कंपनी के कई पूर्व कर्मचारी कंपनी की लगातार वादाखिलाफी के खिलाफ थाने पहुंच गये हैं. कंपनी ने कर्मचारियों को रिलीव तो कर दिया लेकिन दो से 6 महीने तक की बकाया सैलरी, समेत अन्य भत्ते और पीएफ, नोडयूज़ नहीं दिया. इससे परेशान होकर अब कर्मचारियों ने पुलिस का रूख कर लिया है.

भोपाल के एमपी नगर थाने में खबर भारती के खिलाफ कंपनी के ही दर्जनभर पूर्व कर्मचारियों ने लिखित में शिकायत की है, जिसमें ब्यूरो हैड, स्टेट मार्केटिंग हैड, समेत कई सीनियर पत्रकार भी शामिल हैं. कर्मचारियों ने कंपनी के मालिक सीएमडी पुष्पेन्द्र सिंह बघेल, चैनल हैड प्रज्ञान भट्टाचार्य, और स्टेट हैड अनूप सक्सैना को आरोपी बनाने की मांग की है…

पूर्व कर्मचारी कई दिनों से कंपनी से अपनी बकाया सैलेरी और अन्य भत्ते देने की मांग कर रहे थे, लेकिन जब कंपनी ने पैसे देने से साफ इंकार कर दिया तो कर्मियों ने कानून का सहारा लिया है.

दरअसल खबर भारती मे फर्जीवाड़े की शुरुआत चैनल लांच कराने वाले मप्र के टीएन मनीष और आजतक से जुडे रहे यूपी के नाज़िम नकवी में विवाद के बाद से ही हो गई थी. दोनों के चैनल छोड़ने के बाद न्यूज एक्सप्रेस से प्रशांत शुक्ला ने दायित्व संभाला लेकिन वो भी जल्द चलते बने. इसके बाद खबर भारती का जहाज डूबना शुरू हुआ.

प्रज्ञान भट्टाचार्य को कंपनी ने चैनल हेड बनाया. प्रज्ञान ने भोपाल में स्टेट हैड के तौर पर अनूप सक्सैना को तैनात कराया. बस तब से ही कंपनी में पत्रकारों का शोषण शुरू हुआ. पहले तो पत्रकारों की सैलरी रोक दी गई. इसके बाद उनके मोबाइल पेट्रोल समेत तमाम भत्ते और बाद मे पीएफ की राशि भी खाते में डालनी बंद हो गई. पत्रकारों पर दलाली और फर्जी ख़बरें बनाकर लोगों से वसूली का दबाव बनने लगा. मजबूरन पत्रकारों को नौकरी छोड़नी पड़ी और इसके बाद कंपनी ने उनकी 2 से 6 महीने की सैलेरी व अन्य भत्ते रोक दिये.

ये वही पत्रकार थे जिन्होंने खबर भारती की शुरुआत से ही प्रदेश में चैनल को स्थापित किया और तीसरे नम्बर तक ले आये. लेकिन कंपनी कई बार फोन और ईमेल के बावजूद इन्हे सैलेरी के नाम पर 6 महीने तक कोरे आश्वासन दिये. अक्टूबर मे नये एचआर हैड और एडमिन हैड ने इन्हें पहचानने से तक इंकार कर दिया. लिहाज़ा अब 31-10-2013 को इन्होंने एमपी नगर थाने में अलग अलग शिकायतें दर्ज़ करा दी हैं. शुक्रवार सुबह पुलिस ने सबके बयान दर्ज किये हैं. अब पुलिस संबंधित कंपनी और आरोपी अधिकारियों से भी जल्द पूछताछ करेगी.

खबर भारती के ये पूर्व कर्मचारी ज़ी, इंडिया न्यूज़, जानो दुनिया, इंडिया टीवी, और आजतक जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में कार्यरत हैं. सूत्र बता रहे हैं कि अब ये दुखी पत्रकार भोपाल और पूरे मप्र में सांई प्रकाश द्वारा संचालित चिटफंड कंपनियों की पोल खोलने की पूरी तैयारी में हैं. अब देखना यह है कि असली पत्रकारों का ये गुस्सा आगे क्या गुल खिलाएगा. पुलिस एक दो दिन में कंपनी और अधिकारियों के खिलाफ 420 धोखाधड़ी और प्रताड़ना की एफआईआर दर्ज़ कर सकती है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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