गहलोत सरकार की 5 साल की उपलब्धियों के प्रचार के लिए पिछले दिनों लम्बा अभियान चला था…प्रचार की जिम्मेदारी निःसंदेह जनसंपर्क विभाग की थी..निदेशक ने दैनिक भास्कर को उपलब्धियों की पुस्तिका बांटने का ढाई करोड का डायरेक्ट आर्डर दे दिया..उनकी इस इनायत पर.. पत्रिका समूह नाराज हो गया…बाद में पत्रिका को उपलब्धियों का टेबलायड बांटने का डेढ करोड का आर्डर संवाद के माध्यम से दे दिया..अब इस बंदरबांट पर सवाल उठ रहे हैं कि एक ही तरह के दो अलग अलग आदेशों में अलग अलग प्रक्रिया क्यों अपनाई गई…
साथ ही यह भी कि भास्कर को दिए गए सीधे आर्डर का निहितार्थ यह है कि विभाग ने खुद पुस्तिका छपवाकर बांटने के लिए भास्कर को उपलब्ध करवाई थीं…तो स्टोर रजिस्टर में छपकर आने और बंटने के लिए जारी किए जाने की ऐन्ट्री होनी चाहिए..अब आडिट आब्जेक्शन से बचने के लिए निदेशक महोदय बैक डेट में ऐन्ट्री कराने का प्रयास कर रहे हैं..वैसे सुना है भास्कर पर विशेष कृपा की ऐवज में 20 लाख का प्रसाद मिला है… तो पत्रिका से भी कुछ चढावा तो पाया ही होगा..
लेखक धीरज कुलश्रेष्ठ राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार हैं.





