लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार उसके कर्मचारियों द्वारा जनहित याचिका दायर करना कर्तव्यहीनता और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है. मई 2013 में आइपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर ने उत्तर प्रदेश की विभिन्न जांच एजेंसियों- सतर्कता अधिष्ठान, सीबी-सीआईडी आदि द्वारा अपनी जांच पूरी करके शासन के पास अनुमति के लिए भेजे जाने और शासन की अनुमति के बाद ही अग्रिम कार्यवाही किये जाने को दंड प्रक्रिया संहिता के विरुद्ध बताते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक पीआईएल दायर किया था.
हाई कोर्ट ने इस पीआईएल पर संज्ञान लेते हुए शासन को जवाब देने को कहा था और प्रकरण अभी हाई कोर्ट में विचाराधीन है. लेकिन इसी बीच सरकार ने श्री ठाकुर को कारण बताओ नोटिस निर्गत किया है जिसमें कहा गया है कि उन्होंने पीआईएल दायर करके सरकार की आलोचना की है जो कर्तव्यहीनता और अनुशासनहीन आचरण है.
सहयाची डॉ नूतन ने इसे हाई कोर्ट की अवमानना और एक नागरिक को उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित करने और उसे गलत का विरोध करने पर नाजायज़ तरीके से धमकी देना बताते हुए इसकी तीव्र भर्त्सना की है.





