कल दोपहर बारह बजे जब दर्जनों पत्रकार महुआ को घेर कर घंटों नारेबाजी व भाषणबाजी करने लगे और महुआ आफिस के भीतर न्यूज रूम कब्जाए मीडियाकर्मियों के समर्थन में ललकारने लगे तो महुआ प्रबंधन यानि पीके तिवारी व मीना तिवारी के पैरों के तले से जमीन खिसक गई. उन्हें अंदाजा नहीं था कि फिल्म सिटी में लोग आकर महुआ के सामने खड़े होकर नारे भी लगाएंगे और घंटों सभा करेंगे.
आनन फानन में महुआ मैनेजमेंट ने पुलिस से संपर्क किया और जाने क्या सेटिंग की कि पुलिस वाले धड़धड़ाते हुए कल शाम को महुआ न्यूज रूम में घुस गए हड़ताली मीडियाकर्मियों को आफिस से बाहर निकालने के लिए. उस वक्त की कुछ तस्वीरें जो भड़ास को वहां मौजूद साथियों ने मेल किया, यूं है…






पीके तिवारी का दांव तब उल्टा पड़ गया जब पुलिस घुसते ही वहां मौजूद हड़ताली कर्मियों ने भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह को फोन कर दिया और देखते ही देखते यशवंत ने लखनऊ से लेकर नोएडा, दिल्ली तक के कई प्रभावशाली नेताओं, अफसरों, संपादकों को सूचित कर हर हाल में पुलिस को वापस लौटाने के लिए अनुरोध किया. बाद में पता चला कि महुआ परिसर में डंडाधारी सैकड़ों पुलिस वाले आ गए थे जिन्हें कहा गया था कि हर हाल में रात तक इन हड़तालियों को बाहर निकाल देना है. यह सब इसलिए क्योंकि महुआ मैनेजमेंट को आंदोलन के भड़कने, तेज होने और उग्र होने की आशंका होने लगी थी.
पर जब लखनऊ से लेकर हर जगह से बड़े अफसरों, नेताओं आदि के फोन नोएडा के जिम्मेदार अधिकारियों के पास पहुंचने लगे तो पुलिस को बिना किसी एक्शन के वापस लौटना पड़ा. साथ ही मामले को सुलझाने की प्रक्रिया के तहत महुआ मैनेजमेंट पर दबाव पड़ने लगा कि वे जेनुइन मांगों के लिए लड़ रहे महुआ मीडियाकर्मियों की सेलरी वाली मांग हर हाल में मान लें. अंततः मजिस्ट्रेट के आने के बाद दोनों पक्षों का बयान लेकर सेलरी देने के लिए महुआ मैनजमेंट को कह दिया गया. पीके तिवारी और मीना तिवारी को अपने हड़ताली कर्मियों के आगे झुकते हुए सेलरी देने की घोषणा करनी पड़ी. उसी के तहत आज नगद व चेक के जरिए तीन महीने की सेलरी सभी महुआ कर्मियों को दे दी गई.
ये है महुआ के न्यूज रूम में पुलिस प्रवेश के दौरान का एक वीडियो… क्लिक करें….
http://www.youtube.com/watch?v=_m1Rqmg5330
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