फिर एक दुखद खबर है। हमारे समय के एक बड़े आलोचक, कवि और कहानीकार परमानंद श्रीवास्तव नहीं रहे। आज सुबह गोखपुर के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वरिष्ठ साहित्यकार और आलोचक प्राध्यापक परमानंद श्रीवास्तव 80 वर्ष के थे।
हिन्दी के शीर्ष आलोचकों में से एक रहे परमानंद को 'भारत भारती' तथा 'व्यास सम्मान' सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। गोरखपुर के निकट बांसगांव में जन्मे परमानंद ने डॉं. नामवर सिंह के साथ लंबे समय तक स्वतंत्र रूप से साहित्यिक पत्रिका 'आलोचना' का संपादन किया था।





