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कानपुर में दर्जन भर से ज्यादा सफेदपोश जुआ खेलते पकड़े गए, माडिया मालिकों के नाम की भी चर्चाएं

कानपुर से खबर है कि स्वरूप नगर और ग्वाल टोली पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर शहर के दर्जन भर से ज्यादा सफेदपोशों को जुआ खेलते पकड़ा. ये लोग दिल्ली और मुंबई के तर्ज पर कसीनो वाले टोकेन सिस्टम के जरिए जुआ खेल रहे थे. एक-एक टोकेन का दाम लाखों-करोड़ों रुपये में होता है. बताया जाता है कि स्वरूप नगर थाने में 15 लोगों के खिलाफ नामजद और करीब 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ जुआ खेलने का मामला दर्ज किया गया है. इसी तरह ग्वालटोली पुलिस ने छह नामजद और दर्जन भर से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

कानपुर से खबर है कि स्वरूप नगर और ग्वाल टोली पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर शहर के दर्जन भर से ज्यादा सफेदपोशों को जुआ खेलते पकड़ा. ये लोग दिल्ली और मुंबई के तर्ज पर कसीनो वाले टोकेन सिस्टम के जरिए जुआ खेल रहे थे. एक-एक टोकेन का दाम लाखों-करोड़ों रुपये में होता है. बताया जाता है कि स्वरूप नगर थाने में 15 लोगों के खिलाफ नामजद और करीब 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ जुआ खेलने का मामला दर्ज किया गया है. इसी तरह ग्वालटोली पुलिस ने छह नामजद और दर्जन भर से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

बताया जाता है कि पुलिस टीमों ने कानपुर के स्वरूप नगर में स्थित आलीशन बंगलों पर धावा बोला और इन्हें चारों तरफ से घेर लिया. पुलिस को यहां बड़े पैमाने पर जुआ चलने की सूचना मिली थी. मौके से पुलिस ने कई उद्योगपतियों, डाक्टर, बिल्डर, ज्वेलर, कारोबीरियों आदि को पकड़ा. इन लोगों को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया. बताया जाता है कि पकड़े गए लोगों में एक बड़े अखबार का मालिक भी है जो इससे पहले भी कानपुर पुलिस के कोप का सड़क पर शिकार हो चुका है. हालांकि अभी ये पुष्टि नहीं हो पाई है कि क्या वाकई नामजद एफआईआर जिन लोगों के खिलाफ हुआ है उसमें अखबार मालिक का नाम भी है या नहीं. पर ये तो कनफर्म है कि सिंहानिया से लेकर कोठारी घराने तक के कारोबारी इस जुआ खेल में धरे गए.

मीडिया में इस पूरे प्रकरण को दबा दिया गया क्योंकि ये बड़े घराने या तो खुद मीडिया हाउस संचालित करते हैं या फिर मीडिया वालों को साल में करोड़ों का विज्ञापन देते हैं. कानपुर से संचालित के. न्यूज चैनल ने इस मामले को आज रात नौ बजे के शो में दिखाया. के. न्यूज के रिपोर्टर परशुराम द्विवेदी ने पूरा प्रकरण विस्तार से दर्शकों को बताया. पर के. न्यूज के शो में भी जिन कई उद्यमियों के नाम लिए गए उनमें अखबारी जगत से जुड़ा कोई उद्यमी नहीं था. उधर, समाचार एजेंसियों ने भी इस समाचार को रिलीज नहीं किया क्योंकि एक अखबारी मालिक जो खुद जुआ खेलने में शामिल थे, एक बड़ी समाचार एजेंसी के कर्ताधर्ताओं में शुमार हैं.

फिलहाल बड़े लोगों के जुआ खेलते धरे जाने पर आम लोग काफी मजे ले रहे हैं. साथ ही इन बड़े लोगों के असली चेहरे भी जनता के सामने आ गए हैं जो वैसे तो मंचों, सामाजिक कार्यक्रमों, आयोजनों आदि में बड़ी बड़ी बातें करेंगे लेकिन खुद का लेवल इतना चीप रखेंगे कि सुन देखकर हर किसी को हैरत होगी. उधर, प्रशासनिक व पुलिस अफसरों में इस बात को लेकर खूब चर्चाएं हैं कि कितने बड़े लोगों पर हाथ डालने में पुलिस सफल हुई है. पुलिस को हर साल इन बड़े और रसूखदार जुआड़ियों के बारे में सूचनाएं मिलती थी लेकिन जब ये बड़े जुआड़ी खुद सत्ता सरकार के खास हों तो पुलिस भला कैसे हाथ डाल सकती थी.

कानपुर में पुलिस की कमान इन दिनों मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खास यशस्वी यादव के हाथ होने से ये माना जा रहा है कि यशस्वी यादव ने बड़े लोगों के जुआ रैकेट पूर पूरा होमवर्क कराने और अपने उपर के लोगों को कनवींस कर हरी झंडी लेने के बाद आगे की कार्रवाई को बेहद गोपनीयता के साथ अंजाम दिलाया. यही कारण है कि बड़े लोगों को पुलिस छापेमारी की भनक तक नहीं लग सकी और इन्हें मौके से पकड़ लिया गया. पुलिस ने मौके की वीडियो रिकार्डिंग भी कराई है ताकि कल को कोई बड़ा आदमी इस जुआ गिरोह में होने से इनकार न कर दे. इस पूरे मामले की कई परतें हैं जो धीरे-धीरे खुल रही हैं.

अगर आपको भी इस जुआ कांड के बारे में कोई खास जानकारी हो या पुलिस एफआईआर में नामजद लोगों के नाम पता हों तो भड़ास के पास [email protected] पर मेल करके पहुंचाएं.

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