कहानी अब साफ हो रही है. असल में विनोद कापड़ी टीआरपीबाज कलाकार है, इसलिए चुनावों के इस मौसम में उसकी कोई जरूरत रजत शर्मा के इंडिया टीवी को थी नहीं. कई राज्यों में विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव. इतने दिनों तक पूरा देश पोलिटिसाइज हुआ रहेगा. लोग राजनीतिक मसलों को ज्यादा ध्यान से देखेंगे, सुनेंगे. ऐसे में दुनिया के खत्म हो जाने सरीखी फर्जी स्टोरी और इस स्टोरी से जुड़ी गुफा के नीचे से निकलती नाक दबाई आवाज की कोई जरूरत रह नहीं गई थी.
चुनावों के समय में वही चैनल टीआरपी में सबसे आगे होगा जो राजनीतिक खबरों, पोलिटिकल शो को बढिया से प्लान कर लेगा, बढिया से दिखा देगा. यही कारण है कि रजत शर्मा ने विनोद कापड़ी को फिल्म बना डालने के लिए छुट्टी दे दी और कमर वहीद नकवी जैसे वरिष्ठ व गंभीर पत्रकार को अपने यहां ले आए. साथ ही खुद प्राइट टाइम एंकरिंग को अपने हाथ में ले लिया, 'आपका फैसला' नामक शो के जरिए.
रजत शर्मा की तारीफ करनी होगी कि वो खुद इतने बड़े चैनल का मालिक होने के बावजूद एक आम पत्रकार की तरह एंकरिंग करने लगे हैं. यह उनके अंदर के पत्रकार के जिंदा होने का सबूत है. वो छोटी-मोटी पोलिटिकल खबरों पर भी चर्चा-डिस्कस कर रहे हैं. हालांकि उनके एंकरिंग करने से उनके सामने उनके चैनल के शिशु टाइप पोलिटिकल रिपोर्टर लाइव देते हुए हकलाते-घबराते दिखते हैं, पर जल्द ही ये ठीक हो जाएंगे क्योंकि काम करते करते थोड़े दिनों में उन्हें सीधे रजत शर्मा के साथ काम करने की आदत पड़ जाएगी.
उधर, कुछ लोगों को कहना है कि दूरदर्शी रजत शर्मा ने भांप लिया है कि अब न्यूज चैनलों से तमाशे के दिन गए. वो एक दौर था जब तमाशे दिखते बिकते थे. अब जो नई पीढ़ी दर्शक बनकर उभरी है, वो ज्यादा तकनीकी सेवी है और वह रेशनल-लाजिकल चीजों को चाहती है. इसलिए धीरे-धीरे ट्रेंड बदल रहा है. लोग वो खबरें ज्यादा देखना पसंद करते हैं जिसमें नयापन हो, लाजिक हो, मुकाम हो और डाउन टू अर्थ हो. इस मामले में दीपक चौरसिया का उदाहरण लिया जा सकता है जिन्होंने लड़कियों के शोषण के खिलाफ उपजे सेंटीमेंट को भुनाते हुए आसाराम के खिलाफ जो अभियान चलाया उससे इंडिया न्यूज देखते ही देखते टीआरपी में बमबम हो गया.
उसी तरह इंटेलीजेंड बच्चों का टेस्ट लाइव करके भी नए जमाने की पसंद को दीपक चौरसिया के चैनल ने आगे किया. जल्द ही सारे न्यूज चैनलों को अपना फार्मेट बदलना होगा और ऐसे लोगों के हवाले न्यूज चैनलों को करना होगा जो नए शहरी यूथ की पसंद, मन, मिजाज, टेस्ट को समझता हो. यही दर्शक विज्ञापनदाताओं की आजकल पहली पसंद है और टीआरपी मीटर पर इन्हीं को सबसे ज्यादा खोजा-तलाशा जाता है.
तो, मान लिया जाए कि विनोद कापड़ी अब फीचर फिल्म बनाते रहेंगे क्योंकि उनके जैसों का दौर टीवी न्यूज इंडस्ट्री से खत्म हो चुका है? इसका जवाब हां भी होगा और ना भी होगा. न्यूज चैनल नए नए आते रहेंगे और इन नए न्यूज चैनलों को स्थापित नामों की जरूरत पड़ती रहेगी. सबसे बड़ा जो कयास है वो स्टार न्यूज के आने को लेकर है जिसमें फिल्म बनाने के बाद विनोद कापड़ी के जाने की चर्चाएं हैं. पर लगता नहीं कि स्टार इंडिया के सर्वेसर्वा उदय शंकर अब विनोद कापड़ी को आगे कर कोई रिस्क लेना चाहेंगे. तो ये गुंजाइश है कि विनोद कापड़ी एक साथ दोनों मोर्चों पर काम करें. कुछ महीनों तक किसी न्यूज चैनल में. फिर कुछ महीनों तक किसी फिल्म की स्क्रिप्ट पर. अच्छा है. प्रयोगबाज कलाकारों को काम करने का इतना स्पेस मिलना अच्छी बात है. लगे रहिए कापड़ी साहब. भड़ास आपके साथ है.
भड़ास से जुड़े यशवंत की रिपोर्ट. संपर्क: [email protected]





