Wasim Akram Tyagi : पत्रकारिता के नाम पर सांप्रदायिकता फैलाने वाले अखबार दैनिक जागरण में काम करने वाले मुस्लिम पत्रकार भी उसी श्रेणी में आते हैं जिस श्रेणी में मीर सादिक और मीर जाफर आते हैं। उन्होंने उस वक्त अंग्रेजों के साथ मिलकर सिराजुद्दौला और टीपू सुल्तान के साथ गद्दारी की थी और ये संघ परस्त पांचजन्य के मुखौटे दैनिक जागरण के साथ मिलकर देश को सांप्रदायिक आग के हवाले करने के मंसूबे को खाद पानी दे रहे हैं।
ये स्वार्थी भूल गये हैं या जानबूझकर जमीर का सौदा करके याद रखना नहीं चाहते कि दंगों के जितने जिम्मेदार संघ परिवार, वीएचपी, बजरंगदल, शिवसेना, कांग्रेस आदी पार्टियों के नेता हैं उनसे भी अधिक जिम्मेदार यह संघ परस्त दैनिक जागरण अखबार है। यही वह अखबार है जो कवाल में प्रतिक्रिया में मरने वाले गौरव और सचिन की ऐसी दास्तान बयान करता है जिसे पढ़कर भावनाऐं भड़क जाती हैं। और, पिछले दिनों मुजफ्फरनगर में मारे गये एक विशेष समुदाय के तीन लोगों को यही अखबार नकाबपोश बदमाश लिखता है।
ऐसी न जाने कितनी दास्तानें इस संघ परस्त अखबार ने बयान की हैं जिनमें एक समुदाय हमेशा इसके निशाने पर रहा है। इस अखबार का और इसमें काम करने वाले मुस्लिम पत्रकारों का बहिष्कार होना चाहिये, क्योंकि वे मजलूमों की आवाजों को नहीं बल्कि जालिमों की आवाज को बुलंद कर रहे हैं। यह अखबार अपने साथ मिड डे अंग्रेजी और इंक्लाब उर्दू अखबार भी चलाता है उनका भी बहिष्कार होना चाहिये। कुल मिलाकर इसके सारे प्रकाशनों का बहिष्कार करना होगा।
लेखक वसीम अकरम त्यागी युवा पत्रकार और मीडिया एक्टिविस्ट हैं.





