लखनऊ : सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा उत्तर प्रदेश शासन द्वारा सुरक्षाकर्मी दिये जाने सम्बंधित पीआईएल में सरकार के हलफनामे से कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आई हैं. सुरक्षा शाखा के डिप्टी एसपी अजय कुमार सिंह के हस्ताक्षर से प्रस्तुत हलफनामे के अनुसार वर्तमान में अधिकृत सूची के बाहर कुल 830 लोगों को सरकार द्वारा सुरक्षा दी गयी है.
इन अनधिकृत लोगों में 170 को निशुल्क और 650 को निजी व्यय पर सुरक्षा दी गयी है. हलफनामे के अनुसार इन अधिकृत सूची के बाहर लोगों की सुरक्षा पर कुल रुपये 4.83 करोड़ का व्यय आया है जिसमे रुपये 3. 0 करोड़ की वसूली हो गयी है जबकि रुपये 1.83 करोड़ की वसूली अभी शेष है.
हलफनामे में ऐसे कई व्यक्तियों के नाम भी दिए गए हैं जिन्हें बिना जिला सुरक्षा समिति की संस्तुति के भी सुरक्षा प्रदान कर दी गयी है. जस्टिस इम्तियाज़ मुर्तजा और जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की बेंच ने अनधिकृत लोगों को सुरक्षा दिए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार से पूछा है कि यह बकाया धनराशि अबी तक जमा क्यों नहीं कराया गया, साथ ही 15 दिनों में यह धनराशि जमा कराने के आदेश भी दिए हैं. हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि यह पैसा 15 दिन में जमा नहीं हुआ तो इसके लिए जिले के एसएसपी/एसपी उत्तरदायी होंगे.
कोर्ट ने कहा है कि उन सभी मामलों में जिसमे बिना सुरक्षा समिति की संस्तुति के सुरक्षा प्रदान की गयी है, यदि वह किसी कोर्ट के आदेश पर किया गया है तो राज्य सरकार सुनवाई की अगली तिथि को कोर्ट के आदेश की प्रति प्रस्तुत करे और अन्य सभी मामलों में दी गयी सुरक्षा तत्काल हटायी जाए.
कोर्ट ने जहां डॉ नूतन को अपना जवाब दायर करने को कहा है वहीँ राज्य सरकार को आदेशित किया है कि वह अपनी अनुपालन आख्या प्रमुख सचिव गृह के हस्ताक्षर से प्रस्तुत करे. मामले में अगली सुनवाई की तिथि 02 दिसंबर निर्धारित की गयी है.





