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बरेली

रस्सी में बंधे ये शख्स रुहेलखंड विवि के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डा. इसरार खान हैं

बरेली में इन दिनों बड़ा बाईपास का मसला गरमाया हुआ है. किसान आंदोलित हैं. इन किसानों को भड़काने के जुर्म में एक प्रोफेसर को पुलिस ने कई रोज पहले न सिर्फ गिरफ्तार कर लिया बल्कि ऐसी ऐसी धाराएं लगाईं कि उन्हें जेल जाना पड़ा. कल उन्हें जब अदालत में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था तो पुलिस ने उन्हें रस्सियों में बांध रखा था. जैसे कोई चोर उचक्के या आतंकवादी या हार्डकोर क्रिमिनल हों.

बरेली में इन दिनों बड़ा बाईपास का मसला गरमाया हुआ है. किसान आंदोलित हैं. इन किसानों को भड़काने के जुर्म में एक प्रोफेसर को पुलिस ने कई रोज पहले न सिर्फ गिरफ्तार कर लिया बल्कि ऐसी ऐसी धाराएं लगाईं कि उन्हें जेल जाना पड़ा. कल उन्हें जब अदालत में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था तो पुलिस ने उन्हें रस्सियों में बांध रखा था. जैसे कोई चोर उचक्के या आतंकवादी या हार्डकोर क्रिमिनल हों.

रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा. इसरार खान जनता के आदमी हैं और अक्सर किसानों, मजदूरों, गरीबों की समस्याओं, दिक्कतों, आंदोलनों में शरीक होते हैं. उन्हें इसकी ये सजा मिली कि पुलिस ने बिना कोई जुर्म फर्जी कई तरह की धाराएं लगाकर उन्हें जेल में डाल दिया है. जेल से लेकर अदालत तक में डा. इसरार खान के साथ बुरा सलूक किया जा रहा है, ऐसा उनके समर्थकों का आरोप है. डा. इसरार खान अर्थशासत्र के प्रोफेसर हैं और उन्हें इस देश की आर्थिक स्थिति के कारण गरीबों, किसानों के सामने आईं मुश्किलें ठीकठीक पता है. इसी कारण वो यथासंभव इन गरीबों, किसानों, मजदूरों के पक्ष में खड़ा होते हैं और अपना नैतिक समर्थन देते हैं.

जिस प्रदेश में जंगलराज का आलम हो, वहां किसी नेता, अधिकारी, मंत्री, प्रशासन, सरकार से कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वो आतंकवादी और शिक्षक के बीच फर्क करे. पूरा तंत्र जब लूटपाट में लगा हो तो आंखों से संवेदनशीलता का चश्मा भी उतर चुका होता है. सड़े सिस्टम की आंखें और दिमाग वहीं काम करती हैं, संवेदनशील होती हैं जहां उन्हें मुद्रा दिखाई पड़ता हो या फिर अपने से बड़ा ताकतवर प्राणी.

डा. इसरार खान ने हजारों युवाओं को अर्थशास्त्र पढ़ाया है और उनमें से ज्यादातर बड़े पदों पर आसीन हैं. लेकिन ये गुरु अपने किसी शिष्ट से किसी किस्म की मदद नहीं मांग रहा. जो जुल्म ढाया जा रहा है, उसे चुपचाप सह रहे हैं. कल जब उन्हें पेशी पर अदालत ले जाया गया तो उनके एक शिष्य ने बड़े दुखी मन से ये तस्वीर उतारी और भड़ास के पास भेजा है. फोटो के साथ जो उन्होंने संक्षिप्त सा कैप्शन लिखकर भेजा है, वो ये है- ''एक गुरु को ऐसे बांध रखा है जैसे कोई मुजरिम या आतंकवादी. इस प्रताड़ना के पीछे मंशा है किसानों के हक के लिए लड़ने वाले प्रोफेसर के मनोबल को तोड़ना.''


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