लखनऊ। उत्तरप्रदेश चुनाव का बिगुल बजते ही दल-बदलुओं की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में अवधेश वर्मा और ददन मिश्रा के बाद बहुजन समाज पार्टी से निकाले गए पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और बादशाह सिंह ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया है। इन दोनों मंत्रियों पर एनआरएचएम घोटाले के आरोप लगे थे, जिसकी सीबीआई जांच चल रही है लेकिन बीजेपी ने अपनी ओर से इन्हें क्लीन चिट देते हुए पार्टी में इनका स्वागत किया। पार्टी इन्हें टिकट देने पर भी विचार कर रही है।
बाबू सिंह कुशवाहा यूपी की मुख्यमंत्री मायावती के काफी करीबी माना जाता था। कहा जाता है कि माया के बंगले में जिन कुछ लोगों का बेरोकटोक आना-जाना था उनमें बाबू सिंह भी एक थे, लेकिन एनआरएचएम घोटाले और सीएमओ हत्याकांड के बाद उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया। इसके बाद ही बाबू सिंह कुशवाहा ने माया के करीबियों से जान का खतरा होने का आरोप लगाया। इसके बाद से वो मुख्यमंत्री के आंखों की किरकिरी बन गए और इन दोनों की ठन गई।
कभी इन बसपाइयों को जीभर कर गरियाने वाली भाजपा अब खुद को गंगा समझकर इन गंदे नालों को अपने अंदर समेट रही है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी से जब यह पूछा गया कि पार्टी इन दागियों के सहारे कैसे वैतरणी पार करेगी तो नकवी ने कहा कि बीजेपी एक गंगा है जिसमें आकर सारे नाले शुद्ध हो जाते हैं। वहीं बीजेपी नेता विनय कटियार का मानना है कि बाबू सिंह कुशवाहा के ऊपर कोई मुकदमा नहीं है। उनका कोई दोष नहीं है। उन्हें बेवजह बसपा से निकाला गया और अब हमने उन्हें पार्टी में शामिल किया है। बादशाह सिंह भी एक प्रभावी नेता हैं। इन नेताओं की मदद से पार्टी को यूपी चुनाव जीतने में मदद मिलेगी। बीएसपी के शासन ने जनता त्रस्त है।





