यूपी के चुनाव में हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और होते जा रहे हैं. बीते दिनों में जिन लोगों को महादागी बता कर बीजेपी विरोध कर रही थी. अब उन्हीं लोगों को गले से लगाया जा रहा है. पार्टी को लग रहा हैं कि इन चुनाव में उसकी हालत पतली होने वाली हैं लिहाजा पार्टी अपने प्रत्याशी घोषित करने की जगह बाकी दलों की और देख रही है कि कब यह लोग दूसरे दलों से निकाले जाये और पार्टी उन्हें अपने गले से लगाये.
बीते दिवस शाहजहांपुर की ददरौल विधानसभा के प्रत्याशी अवधेश वर्मा रोते-रोते बीजेपी में शामिल हो गए. इन्हें मायावती ने ना सिर्फ अपने मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया बल्कि इनका टिकट भी काट दिया था. इसके बाद इन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के बीच जोर-जोर से आंसू बहाए और बीजेपी तो इन्तजार कर ही रही थी कि कब मायावती इन लोगों से पीछा छुड़ायें और बीजेपी उन्हें अपने दामन में समेटे.
सबसे मजेदार वाकया आज का रहा. पिछले दिनों लखनऊ में तीन सीएमओ की हत्या के बाद मायावती ने अपने सबसे भरोसेमंद बाबू सिंह कुशवाह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. पूरा प्रदेश जानता था कि माया सरकार के सबसे कमाऊं मंत्री बाबू सिंह ही थे. चाहे खदान का मामला हो या फिर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में करोड़ों का घोटाला हो. सबके तार बाबू सिंह से जुड़ते थे. उनके एक इशारे पर लोग रातों-रात करोड़पति हो जाते थे. उन्हीं के कारण स्वास्थ्य मंत्रालय को दो हिस्सों में बांट कर ज्यादा कमाई वाले स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री के रूप में बाबू सिंह की ताजपोशी की गई थी. बाबू सिंह जिसकी सिफारिश करते वो अफसर घंटों में वहीं तैनात हो जाता.
यूपीएसआईडीसी के बहुचर्चित अभियंता अरुण मिश्र अमर सिंह का सबसे खास था. माया सरकार के बनते ही उसे सबसे पहले निलंबित किया गया. सुना जाता है कि उसने बाबू सिंह से ही संपर्क साधा और गुहार लगाई कि वह पेशगी के तौर पर दस करोड़ देने को तैयार हैं. बस उसके विरुद्ध एसआईटी की जांच को रुकवा दिया जाये. इसके बाद ना सिर्फ जांच रुकी बल्कि अरुण मिश्र बहाल भी हो गए. बीते दिनों सीबीआई ने करोड़ों की हेराफेरी के आरोप में इन्हीं अरुण मिश्र को गिरफ्तार किया. तब भी माना जा रहा था कि अरुण मिश्र और बाबू सिंह के बीच और घोटाले के खुलासे सामने आयेंगे.
बीजेपी ने तीन सीएमओ की हत्या के बाद बहुत बबाल काटा था और कहा था कि इसमें बाबू सिंह भी शामिल हैं. अब इन्हीं बाबू सिंह
को बीजेपी ने अपना लिया. दरसअल बीजेपी को अपनी पार्टी के लिए दमदार प्रत्याशी मिल नहीं रहे. लिहाजा बह बीएसपी या दूसरे दलों का टिकट ना मिल पाने से दुखी प्रत्याशियों की और देख रही हैं. बीजेपी ने बाबू सिंह के साथ ही आज बादशाह सिंह को भी अपनी पार्टी में शामिल कर लिया. यह भी बीएसपी से निकाले गए मंत्री है. लोग पूछ रहे हैं कि अन्ना को समर्थन देने वाली पार्टी अब किस मुंह से नैतिकता की बात करेगी. जाहिर हैं पार्टी के पास इसका कोई दमदार जबाब नहीं होगा.
लेखक संजय शर्मा वीकएंड टाइम्स के संपादक एवं लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं.





