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बड़े पैमाने पर छंटनी से सहारा मीडिया में कोहराम

Yashwant Singh :  सहारा मीडिया में वैसा ही कुछ उपद्रव चल रहा है जैसा आईबीएन7 में हुआ… जैसा महुआ में हुआ.. सैकड़ों लोगों की छंटनी हो रही है… कई साथियों ने फोन कर पूरा वृत्तांत बताया… एक साथी की पत्नी की डिलीवरी कुछ रोज पहले हुई है, सिजेरियन. वो अभी अस्पताल में हैं. इधर छंटनी की चिट्ठी पकड़ा दी गई. जो नहीं इस्तीफा देना चाह रहा, उसे सहारा वाले कह रहे हैं कि तुमसे निपट लिया जाएगा. सीधे सीधे धमका रहे हैं देख लेने की. काम करने वाले खुद को बेहद कमजोर और तनहा पा रहे हैं… प्रिंट, हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, चैनल, मैग्जीन.. सभी जगह से मीडिया वाले निकाले जा रहे हैं…

Yashwant Singh :  सहारा मीडिया में वैसा ही कुछ उपद्रव चल रहा है जैसा आईबीएन7 में हुआ… जैसा महुआ में हुआ.. सैकड़ों लोगों की छंटनी हो रही है… कई साथियों ने फोन कर पूरा वृत्तांत बताया… एक साथी की पत्नी की डिलीवरी कुछ रोज पहले हुई है, सिजेरियन. वो अभी अस्पताल में हैं. इधर छंटनी की चिट्ठी पकड़ा दी गई. जो नहीं इस्तीफा देना चाह रहा, उसे सहारा वाले कह रहे हैं कि तुमसे निपट लिया जाएगा. सीधे सीधे धमका रहे हैं देख लेने की. काम करने वाले खुद को बेहद कमजोर और तनहा पा रहे हैं… प्रिंट, हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, चैनल, मैग्जीन.. सभी जगह से मीडिया वाले निकाले जा रहे हैं…

फोन सुन सुन के कान पक गया है.. सब मुझे ही ललकार रहे हैं… मैं किसे ललकारूं? क्या इस छंटनी पर कुछ कहना, लिखना, बोलना, करना चाहिए… या यूं ही हो जाने देना चाहिए… वैसे भी, जिस सुब्रत राय के पास अरबों खरबों रुपये क्रिकेट और कई अन्य चीजों पर लुटाने देने फेंकने के लिए होते हैं, उनसे हम ये अपेक्षा तो कर ही सकते हैं कि वे अपने मीडियाकर्मियों की छंटनी को रोकेंगे…. इसे बंद कराएंगे… पर कोई कह रहा था कि पच्चीस हजार करोड़ रुपये के जिस घोटाले में वो फंसे हैं, उससे न निकल पाने की गाज अपने मीडिया हाउस पर गिरा रहे हैं और बेहद आम व गरीब किस्म के मीडियाकर्मियों को सहारा निकाला दे रहे हैं…. जर्नलिस्ट सालिडेरिटी फोरम JSF के साथियों से चाहूंगा कि वे संज्ञान लें …. कुछ सोचें, कुछ करें.. मैं उनके साथ हूं.. कोई तो आगे बढ़े ताकि लगे कि हम सब सोच रहे हैं, महसूस कर रहे हैं, उन लोगों के लिए जो बेजुबान हो गए हैं, वक्त की मार से….

    Khandelwal Braj besahara ko to ek din doobna hi hai……
 
    Indu Shekhawat यशवंत भाई, देख लो, दुनियाभर की बतचोदी करने वाले पत्रकार अपने शोषण के खिलाफ नहीं लिख सकते। लिखें भी कहां लिखे। पत्रकार कितनी निरीह, बेबस और लाचार हो जाता है। भड़ास4मीडिया ही एक ऐसा माध्यम अब बन गया है जहां अपनी बात तथा भड़ास निकाली जा सकती है। मुझे भी कहा गया था कि 31 अगस्त तक नौकरी पर हूं, मगर 20 जुलाई को ही हिसाब कर दिया गया। हिसाब करने से पहले मुझसे रिजाइन कराया गया। अगर नहीं करता तो फंड, ग्रेज्यूटी, केज्युल लीव का पैसा आदि सब मार लिया जाता। कौई पैरोकारी करने वाला भी नहीं होता है और उसका कोई लाभ भी नहीं होता है।
 
    Sunil Kumar Sahara ne apne patrkaro ko kiya besahara…. छंटनी की चिट्ठी पकड़ा दी सुब्रत राय…. पच्चीस हजार करोड़ रुपये के घोटाले में फंसे सुब्रत राय उससे न निकल पाने की गाज अपने मीडिया हाउस पर गिरा रहे हैं
 
    Amit Kumar Pandey chirag tale andhera
 
    Arun Sathi पता नहीं दूसरों के लिए हम लड़ते है, पर आपनी बारी में जाने क्यूँ डरते है ..
   
    Khandelwal Braj patrakaron ke liye ladne wala aaj koi sangathan nahin hai. pata nahin unions kya kar rahi hain. agar sab patrakar collectively ek banner ke taley ikatthe hokar pressure banayen to na sirf unkey hiton ki suraksha hogi balki mass media ki disha, line aur length sahi ki ja sakti hai
     
    Sheetal P Singh वैसे इस समय कुछ कहना जब सैकड़ों पत्रकार बिरादरी के रोज़गार बन्द हो रहे हों, मुश्किल है। पर अख़बार TV और एयर लाइन ही वह मृग मरीचिकाएं थीं जिन्हें दिखाकर करोड़ों रिक्शे वालों पटरी वालों और निम्न मध्य वर्ग की बचत का शिकार सहारा इंडिया करता रहा है । एयर लाइन बिकी पर अख़बार TV अभी हैं। क्या कहूँ आप सब ख़ुद समझदार लोग हैं।
 
    Deepak Sharma Yashwant pls do carry on with this community work. People depend on media, mediamen depend on you
 
    Pradeep Sharma आखिर ये क्या हो रहा है?
 
    Pushpandra Kumar Pandey सहारा जहाज डूबना सालो पहले हो चूका था …… अब जहा जनता का पैसा हजम हो चूका हे … और मालिक सारे जहा का जुस्सा अपने कर्मचारियो में ही उतरता हे ……. अगर एक जुटता न रहे तो
 
    Choudhary Neeraj चुनावों के समय चैनल और अख़बारों बड़ी संख्या में खुल रहे हैं लेकिन सहारा पैसा क्यों नहीं कमा पा रहा…
 
    Chandrabhushan Pandey kripya sahara ke ptrakaro aur anya karmi jo patrakarita se jude hai unhe suport kijiye, yahi hai ve log jo hume hamare samaj desh me honewale badlao ke bare me samay samay par aagah karte hai, apwad har jagah hai kripya un apwado ko najarandaz kar loktantra ke chauthe khambe ki into ko samarthan de samaj ka aaina barkarar rahega
   
    Deepak Awasthi pure sahara k reportero ko ek sabha ker ek sath kam band ker dena chahiye sahara k hos thik ho jenge
     
    Deepak Awasthi bhai ham to ek media line ka chota sa worker hu par hamare layak kuch ho to hm taiyar hai adesh kare
     
    Rajnikant Gupta पहले तो नाम बदला अब काम भी बदल रहें है यह कैसा मीडिया है …मीडिया हाऊसों की भी सीबीआई जांच होनी चाहिए
     
    Amrita Maurya Condition is really serious and all the media forums & clubs should be think over the issue. Unity is the first necessity to over come the injustice of media house owners.
     
    Rajnikant Gupta फेसबुक पर तो लिखकर सब अपनी प्रतिक्रिया दे रहें है है कोई जो इस अंदोलम में साथ दे और भाग ले हम बढी बढी बात करते है पर करते कुछ नहीं यदि आप लोग एकसाथ तैयार है तो में कल दिल्ली पहुंच कर आप लोगो के साथ इन लोगो के लिए अंदोलन में शामिल हूं .!!
     
    Manika Sonal Ab ek journalist union banni chahiye.. jisse journalists ko b lage k unke sath kuch galat hua to wo iss union k pass jake media house pe pressure daal sakte h. Warna koi kisi k liye kuch nhi karne wala kyunki sab jante h k unhe job krni h issi media mandi mei..
     
    Mahesh Jaiswal अब समय आ गया है कि कुछ अलग करने का..यशवंत सर आप जल्‍दी हि‍न्‍दी पोर्टल को लेकर वर्कशाप कराने की कोशीश करें, सबको बहुत कुछ सीखने और अलग करने का मौका मि‍लेगा
     
    Kumar Sauvir मेहनतकशों को बेसहारा करने वाले सहारा वालों की नस मैं खूब पहचानता हूं। मेरे साथ हुई खुशनसीबी और सहारा के बदनसीब हादसे को 29 साल बीत गये हैं। मैं समझता हूं कि अब मेरा मंत्र बाकी सहाराकर्मियों के लिए गुरू-मंत्र बन सकता है। सो, अब उस पर लिखने की तैयारी कर रहा हूं। बस थोड़ा सब्र रखिये। प्‍लीज
     
    Indu Shekhawat यशवंत भाई, ऐसे हालातों में पत्रकारों पर दोहरी मार पड़ती है। किसी अन्य पेशे में लोेगों के पास विकल्प होता है पर पत्रकारों के पास तो लेखनी चलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। लिहाजा उन पर भारी परेशानी पड़ती है। परिवार का दबाव, हीनभावना, काम नहीं मिलने की कुंठा आदि के अलावा ऐसे हालात में नजदीकी और परिचित भी दूरी बना लेते हैं। मैंने झेली है ये त्रासदी और झेल रहा हूं।
     
    Manjeet Anand जिसे दुनिया कि लडाई लड़नी है वही ……… उसकी लडाई कोई लड़े इसकी दरकार है
     
    कमल सिंह Lets Do same thing what with Mahuwa ..
 
    Jitendra Narayan नौकरी करनेवाले सब मजदूर ही हैं चाहे वो सरकारी क्षेत्र की नौकरी हो या निजी क्षेत्र की.लेकिन मैं आसपास देखता हूँ कि जैसे ही लोगों को उनकी नौकरी सुरक्षित दिखाई देती है वे जाने-अनजाने में उन सिन्ध्यांतों के पैरोकार होते हैं जो मजदूरों के खिलाफ होते हैं.उदह…See More
 
    Ravikant Tripathi यशवंत जी आप मदद कीजिये लेकिन उससे पहले सहरा वालों से कहिये की वो पहले जोरदार आवाज़ तो उठायें फिर आपका भड़ास 4 मीडिया तो है ही जो किसी का भी बाजा बजा सकता है ।
    
    Banke Lal Sharma भारत में हर जगह मजदूरों को छंटनी का डर सता रहा है, वे छंटनी के नाम पर सिहर उठते हैं लेकिन शासक वर्ग तांडव मचाए हुए हैं, परन्तु जिस दिन जनता तान्डव मचाना शुरु करेगी इन को कहीं जगह नहीं मिलेगी । पत्रकारों के साथ सहानुभूति है ।
 
    Santosh Pathak sahi hai bhaiya aapko kuchh karna hoga

    आवारा आदमी सब प्रभु इच्छा से हो रहा है, आज जो निकाले जा रहें हैं इन्होने अपनी बादशाहत में अपने से नीचे वालों का कितना भला कर दिया जो इनके फटे में कोई कूदे ?

   Narayan Pargain likh dalo yaswat bhai ak hi kiran hai is jag me baki sab to hizey ho gaye hai

   Sahil Sanjan Saare nikamme hain inhe to kahin 5000 ki naukri bhi nahi milegi. Isliye aisa karna lajmi hai

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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