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हे छठी मईया जे हमनी स्ट्रिंगर के सालों से रुलइले बा ओकरो रुलावह माई!

दुर्गापूजा गया, दीपावली गई और अब छठ भी चली गयी. दीपावली के समय महुआ न्यूज़ के कर्मियों ने सेलरी ना मिलने के कारण मैनेजमेंट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया उसी महुआ न्यूज़ में स्ट्रिंगरों के साल साल भर के पैसे बाकी हैं उसके बारे में किसी नहीं सोचा. सब अपना-अपना पेट भरने में लगे हैं. अरे महुआ न्यूज़ में काम करने वालों! एक दीपावली में पेमेंट नहीं मिलता देख विद्रोह कर दिए, ऐसी कई दीपावली स्ट्रिंगरो ने बिना पैसे मनाई है क्यों नहीं उनके लिए आप लोगों की मानवीय संवेदना जगी.
दुर्गापूजा गया, दीपावली गई और अब छठ भी चली गयी. दीपावली के समय महुआ न्यूज़ के कर्मियों ने सेलरी ना मिलने के कारण मैनेजमेंट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया उसी महुआ न्यूज़ में स्ट्रिंगरों के साल साल भर के पैसे बाकी हैं उसके बारे में किसी नहीं सोचा. सब अपना-अपना पेट भरने में लगे हैं. अरे महुआ न्यूज़ में काम करने वालों! एक दीपावली में पेमेंट नहीं मिलता देख विद्रोह कर दिए, ऐसी कई दीपावली स्ट्रिंगरो ने बिना पैसे मनाई है क्यों नहीं उनके लिए आप लोगों की मानवीय संवेदना जगी.
ये हाल सिर्फ महुआ न्यूज का नहीं इण्डिया न्यूज, साधना न्यूज और कई रीजनल चैनल के भी हैं. यहाँ तक कि अपने आप को एक बड़ा चैनल के रूप में स्थापित करने वाले कई नेशनल चैनल का भी है, क्यों नहीं उन सभी स्ट्रिंगरो के लिए किसी की भी मानवीय संवेदना जगती है. जब कोई फेस्टिवल आता है तो ये स्ट्रिंगर इंतज़ार करते हैं कि चैनल वालों का कलेजा पसीझे और कुछ पैसे चैनल वाले भेज दें ताकि बीबी, बच्चों की दो फीसदी मांग को पूरा कर दें, लेकिन ऐसा होता नहीं है. 
 
चैनल में बैठे इन लुटेरों को लगता है कि हम स्ट्रिंगर फील्ड में वसूली करके मस्त रहते हैं अगर ऐसा रहता तो आज मेरा दिल रोकर यशवंत भाई को मेल नहीं लिख रहा होता. यशवंत भाई आपने महुआ वालों की सेलरी की लड़ाई को एक मजबूत मंच दिया पर आप जानते हैं कि ये वही लोग हैं जो हम जैसे स्ट्रिंगरों को प्रताड़ित करते हैं. काम 24-24 घंटा लेते हैं और जब पेमेंट की बात इनसे करो तो अपना पल्ला झाड़ लेते हैं और जरा सा इनके काम को नजरअंदाज कर अपने रोजी रोटी के लिए किसी दूसरे काम में लगो कि ये  चैनल से हमें निकाल कर किसी और नए मुर्गे को बहाल कर देते हैं. आप देखना यशवंत जी हमेशा तबाह और बर्बाद रहेंगे ये लोग. भीख नहीं मांगे ये लोग तो देखना आप. सैकड़ो स्ट्रिंगर की आह इन लोगों को खा जायेगी. जैसी करनी होगी वैसी भरनी तो होगी. ई बार छठी मईया से इहे मांगतानी कि, हे छठी मईया जे हमनी स्ट्रिंगर के सालों से रुलइले बा ओकरो रुलावह माई! 
 
एक स्ट्रिंगर द्वारा भेजा गया मेल
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