दैनिक जागरण वाले कोई ऐसा मौका नहीं चूकते जिसके तहत मुस्लिमों को नीचा दिखाया जा सके. नीचे दी गई दो खबरें पढ़िए. पहले तो जागरण ने जोरशोर से छाप दिया कि मस्जिद में जुआ चल रहा था. बाद में जब लोगों ने इस पर जमकर बवाल काटा तो खंडन छापा कि मस्जिद में नहीं बल्कि मोहल्ले में जुआ चल रहा था. इसे आप क्या कहेंगे? क्या खबर लिखने वाले को पता नहीं कि मस्जिद में जुआ खेलने जैसी शर्मनाक घटना संभव नहीं है. पर जागरण वालों को मुस्लिमों को बदनाम करना है, नीचा दिखाना है, इसलिए कुछ भी छाप सकते हैं.


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