मुख्यधारा मीडिया ने पूर्वोत्तर भारत को लगभग भुला ही रखा है। देश के पांच राज्यों में विधान सभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हैं, लेकिन मीडिया में केवल चार राज्यों के चुनावों के बारे में ही चर्चाएं हो रही हैं। पूर्वोत्तर भारत के राज्य मिजोरम का न तो कोई ओपिनियन पोल दिखाया जा रहा है न ही वहां विधान चुनाव की कोई खबरें। टीआरपी के अनुसार चलने वाले मुख्यधारा के मीडिया को मिजोरम की चुनावी गर्मी प्रभावित नहीं कर पा रही हैं।
आगामी महीने में भारत के पांच राज्यों दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व मिजोरम में विधान सभा के चुनाव संपन्न होने वाले हैं। समाचार चैनलों और अखबारों में केवल चार राज्यों के चुनावों से संबंधित खबरों को ही प्रथामिकता से दिखाया जा रहा है। ओपियन पोल भी केवल चार राज्यों के ही दिखाए जा रहे हैं। मिजोरम के चुनाव संबंधी खबरें केवल टिकर या संक्षेप में ही शामिल की जा रही हैं।
पूर्वोत्तर भारत में देश के आठ राज्य आते हैं। आठ राज्यों में लोक सभा की 25 सीटें है, जिसमें असम में सबसे अधिक 14 लोक सभा सीटें है। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में ईसाई आबादी सबसे अधिक है और कांग्रेस पार्टी का दबदबा है। मिजोरम में केवल एक लोक सभा सीट है और विधान सभा की 40 सीटें हैं। गठबंधन के दौर में लोक सभा की 25 सीटें कम महत्व नहीं रखती है, इस लिहाज वहां की खबरों का भी कम महत्व नहीं है।
मीडिया की उपेक्षा का ही कारण है कि देश के अधिकांश आम लोगों को पूर्वोत्तर राज्यों की जानकारी तो छोड़िए, राजधानियों के नाम भी पता नहीं होते हैं। किसी से अचानक पूछ लिया कि मिजोरम की राजधानी क्या है तो वह सोचने लगता है। सामान्य ज्ञान में तेज ऐसे कम ही लोग मिलेंगे जो पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानी व संस्कृति के बारे में बारीकी से बता पाएंगे। पांचो राज्यों में विभिन्न पार्टियां अधिकांश उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर चुकी हैं। मीडिया में केवल चार राज्यों के बारे में ही दिखाया गया। आम दर्शक को पता ही नहीं चला कि मिजोरम में उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी हो चुकी है। उससे संबंधित खबरें भी मीडिया के किसी कोने से चुपचाप निकल गईं। मिजोरम में भी चुनावी दंगल कम रोचक नहीं है। मिजोरम के मध्य में स्थित सरचिप विधान सभा पर चार बार सीएम रह चुके कांग्रेस के पीयू ललथनहवला को मिजोरम डेमोक्रेटिक एलायंस के प्रत्याशी लालरमजउवा से कटी टक्कर मिल रही है। जीते कोई लेकिन मुकाबला रोचकता से भरपूर बताया जा रहा है। दिल्ली से चलने वाला मुख्य धारा मीडिया इन सब से अनजान बना हुआ है।
मिजोरम ही अकेला राज्य नहीं है। पूर्वोत्तर के सभी राज्य दिल्ली से चलने वाले मीडिया की उपेक्षा के शिकार हैं। चुनाव ही नहीं इन राज्यों में घटने वाली मुख्य घटनाएं भी मीडिया की पर्याप्त सुर्खियां नहीं बटोर पाती हैं। अभी हाल में ही इंफाल में हुए बोडो आतंकवादियों द्वारा बम धमाके व दो लोगों की मौत भी खबर नहीं बन पाई। टीआरपी को प्राणवायु समझने वाले मीडिया के लिए दिल्ली में किसी महिला के साथ होने वाला अत्याचार महीने भर के लिए मसाला होता है, लेकिन पूर्वोत्तर में किसी महिला के साथ होना वाला अपराध खबर भी नहीं बन पाता है। पूर्वोत्तर की संस्कृति और साहित्य के बारे में तो मीडिया से उम्मीद ही नहीं की जा सकती है। दिल्ली से चलने वाले राष्ट्रीय चैनलों और अखबारों के पूर्वौत्तर के राज्यों में नियमित ऑफिस भी नहीं हैं।
आशीष कुमार पत्रकारिता एवं जनसंचार में शोध कर रहे हैं. इनसे 09411400108 पर संपर्क किया जा सकता है.