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दिल्ली

ओवर कान्फिडेंस में है दिल्ली बीजेपी

फॉरमेलिटी के लिए चुनाव लड़ रही है कई सीटों पर: विधानसभा चुनावों के लिए पहली लिस्ट घोषित होते ही बीजेपी ओवर कान्फिडेंस में आ गई है। इससे लगने लगा है कि बीजेपी चुनाव जीता हुआ मान कर बैठ गई है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बहुत सारी सीटें ऐसी हैं, जहां पर यदि कांग्रेस ठीक से उम्मीदवार उतार दे तो उसकी जीत निश्चित हो जाएगी। यदि दूसरे शब्दों में कहें तो जनता बीजेपी को जिताना चाहती है, लेकिन बीजेपी खुद ही जीतना नहीं चाहती।
फॉरमेलिटी के लिए चुनाव लड़ रही है कई सीटों पर: विधानसभा चुनावों के लिए पहली लिस्ट घोषित होते ही बीजेपी ओवर कान्फिडेंस में आ गई है। इससे लगने लगा है कि बीजेपी चुनाव जीता हुआ मान कर बैठ गई है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बहुत सारी सीटें ऐसी हैं, जहां पर यदि कांग्रेस ठीक से उम्मीदवार उतार दे तो उसकी जीत निश्चित हो जाएगी। यदि दूसरे शब्दों में कहें तो जनता बीजेपी को जिताना चाहती है, लेकिन बीजेपी खुद ही जीतना नहीं चाहती।
 
अपने इसी ओवर कान्फिडेंस के चलते बीजेपी ने बहुत सारे ऐसे लोगों को टिकट दे दी है, जो उस इलाके के ही रहने वाले नहीं हैं और उनका इलाके में कोई जनाधार नहीं है। बीजेपी ने अपनी इस कड़ी में नई दिल्ली से विजेन्द्र गुप्ता, लक्ष्मी नगर से अभय कुमार वर्मा, शाहदरा से जितेन्द्र सिंह शंटी, ग्रेटर कैलाश से अजय मल्होत्रा, गांधी नगर से आर.सी. जैन, कस्तूरबा नगर से शिखा राय, महरौली से प्रवेश वर्मा को उम्मीदवार बना दिया है। आदर्श नगर सीट से चुनाव लड़ रहे पवन गोयल भी पीतमपुरा के रहने वाले हैं। इसी तरह से कालकाजी सीट अकालियों के लिए छोड़ दी गई, जबकि ये सीट किसी गुर्जर के लिए अच्छी मानी जाती है। यह कुछ ऐसी सीट कही जा रही हैं, जहां से नाम घोषित होते ही हार तय हो गई है। अलबत्ता बीजेपी की लहर होने के बावजूद उसकी दाल गलती नजर नहीं आ रही है।
 
बताते हैं कि विजेन्द्र गुप्ता रहते रोहिणी में हैं और चुनाव नई दिल्ली से लड़ रहे हैं। अपने पूरे चुनाव प्रचार अभियान के दौरान यदि लोग उनका नाम भी जान जाएं तो उनके लिए यह किसी उपलब्धि से कम नहीं होगा। इसी तरह लक्ष्मी नगर में भी अच्छे उम्मीदवारों का टोटा पड़ा हुआ था, वहां पर मुखर्जी नगर में रहने वाले वकील अभय कुमार वर्मा को टिकट देकर डॉ. अशोक वालिया को ईजी पास दे दिया गया है। गांधी नगर से बीजेपी के उम्मीदवार आर.सी. जैन ने सारी जिंदगी कांग्रेस की सेवा की है, लेकिन वहां पर टिकट बंटवारे के नाम पर लवली को तश्तरी में सीट परोस कर दे दी गई है। पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा को भी महरौली ले जाकर पार्टी ने पटक दिया है। यदि उन्हें नांगलोई से टिकट दी जाती तो कांग्रेस के मा. विजेन्द्र सिंह के लिए वह कड़ी चुनौती साबित हो सकते थे। अब महरौली के लोग ही श्री वर्मा का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में योगानंद शास्त्री से लडने की बजाय वह अपने ही घर को संवारने में लगे हुए हैं। अब महरौली में जाकर चुनाव जीत पाएं, इतने बड़े राष्ट्रीय नेता वह नहीं हैं। शाहदरा सीट पर इस बार भी जीवनभर कांग्रेस के झंडाबरदार रहे जितेन्द्र सिंह शंटी को बीजेपी ने टिकट दे दिया। वह बीजेपी के समानांतर अपना संगठन चलाते रहे हैं और उन्होंने कभी भी बीजेपी के नेताओं को कोई तरजीह नहीं दी।
 
कांग्रेस पर वंशवाद का आरोप लगाने वाली बीजेपी दिल्ली के चुनावों में टिकट बंटवारे के बाद खुद वंशवाद में घिर गई है। विजय कुमार मल्होत्रा को इस बार लोकसभा लड़नी है। इस वजह से उनके बेटे अजय मल्होत्रा को ग्रेटर कैलाश से पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है। अजय की उम्मीदवारी पर बीजेपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसा लगता है कि बीजेपी इस बार विजय कुमार मल्होत्रा पार्टी बन गई है। क्योंकि इस बार ज्यादातर टिकट श्री मल्होत्रा के करीबी लोगों को मिली है। उसमें जीत हार का कोई पैमाना तय नहीं किया गया है।
 
अब देखना है कि बीजेपी की लहर में सारे अनाड़ी पार लगते हैं या फिर अपने साथ बीजेपी की नैया डुबाते हैं। क्या डॉ. हर्षवर्धन सीएम इन वेटिंग ही रहेंगे? और शीला दीक्षित चौथी बार चुनाव जीत कर यहां पर इतिहास बनाएंगी।
 
बागी बिगाड़ सकते हैं बीजेपी का समीकरण: दिल्ली विधानसभा चुनावों में इस बार बीजेपी का समीकरण बागी बिगाड़ सकते हैं। सबसे पहले इंद्रप्रस्थ न्यूज रिपोर्टर ने अपने पिछले अंकों में खुलासा किया था कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक नगर निगम की महापौर आम आदमी पार्टी में जा सकते हैं। सरिता गुप्ता ने बीजेपी पार्टी छोड़ कर आप से हाथ मिला लिया है।
 
इसके अलावा बीजेपी के कई बड़ असंतुष्ट नेताओं ने बीजेपी के सीएम इन वेटिंग डॉ. हर्षवर्धन को भी चुनावों में हरवाने की तैयारी शुरू कर दी है। उनकी कोशिशें इसलिए कामयाब नहीं होने वाली क्योंकि डॉ. हर्षवर्धन को सीएम घोषित करते ही इलाके के लोग अपनी नाराजगी भुला चुके हैं।
 
उल्लेखनीय है कि कस्तूरबा नगर सीट पर बीजेपी ने शिखा राय को टिकट दी है। यहां पर यह टिकट किसी मेरिट की ना होकर केवल सुषमा स्वराज को खुश करने के लिए दी गई है। सुश्री राय के लिए सुषमा स्वराज ने जी जान लगाई हुई थी। अब इस सीट पर बीजेपी को कांग्रेस से जीतने से पहले अपनी ही पार्टी की बागी महापौर और स्थानीय निगम पार्षद सरिता चौधरी से निपटना होगा। इसी तरह मुंडका सीट पर बीजेपी के उपमहापौर मा. आजाद सिंह बीजेपी उम्मीदवार के सामने चुनौती बनकर खड़े गए हैं।
 
वहीं पूर्वी दिल्ली में विश्वास नगर सीट पर अरुण जेटली की सिफारिश पर सबके कामों को नजरंदाज करके दोबारा ओमप्रकाश शर्मा को टिकट दिया गया है। वह पहले भी इस सीट पर चुनाव हार चुके हैं। चूंकि खुद को वह अरुण जेटली का राजनीतिक सलाहकार होने का दावा करते हैं। ऐसे में श्री जेटली ने भी योग्यताओं और क्षमताओं को दरकिनार कर अपने करीबी को टिकट दिलाना ज्यादा जरूरी समझा। यहां पर युवा नेता और मयूर विहार के पूर्व जिलाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल उनके सामने बागी के रूप में चुनौती बनकर खड़े हो गए हैं।
 
इसी तरह से नगर निगम शाहदरा उत्तरी क्षेत्र के चेयरमैन संजय जैन सीलमपुर से टिकट मांग रहे थे। इससे पहले वह यहां से विधायक का चुनाव हार चुके हैं। वह भी बीजेपी के उम्मीदवार कौशल मिश्रा की भितरघात करने में जुटे हुए हैं। यही हाल करीब एक दर्जन और सीटों का भी है। यदि बीजेपी अपनी कलह को दूर करने के लिए तुरंत कदम नहीं उठाती तो वह समय दूर नहीं कि पार्टी एक बार फिर विपक्ष में बैठने को मजबूर हो जाए।
 
इस बार बलि के बकरे बनाए गए विजेन्द्र गुप्ता: दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता को इस बार दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के सामने बलि का बकरा बना दिया गया है। नई दिल्ली सीट पर विजेन्द्र गुप्ता के नाम के ऐलान से ऐसा लगता है कि इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी में सेटिंग हो गई है। उसका बदला कांग्रेस बीजेपी के सीएम इन वेटिंग के सामने हल्का उम्मीदवार उतार कर चुकाएगी।
 
सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली सीट पर श्री गुप्ता के नाम की घोषणा होने के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल पैदा हो गया है। उन्हें लगने लगा कि उनके द्वारा किए जा रहे काम की कोई अहमियत नहीं है। ऐसे में स्थानीय कार्यकर्ता अपने जिले की दूसरी सीटों के उम्मीदवारों के साथ चुनाव प्रचार में उतर गए हैं। उनका कहना है कि श्री गुप्ता का हाल भी विजय जौली जैसा होगा। श्री जौली ने मीडिया में तो खूब हो हल्ला किया, लेकिन चुनाव के दिन उन्हें पूरे पोलिंग एजेंट भी नसीब नहीं हुए थे। उल्लेखनीय है कि पोलिंग एजेंट बनने के लिए जरूरी है कि उस एजेंट का नाम उसी मतदान केंद्र में होना जरूरी है। ऐसे में श्री गुप्ता पोलिंग एजेंट की व्यवस्था कैसे करेंगे यह तो राम जाने।
 
बताते हैं कि नई दिल्ली सीट पर नई दिल्ली नगर पालिका परिषद से वरिष्ठ अधिकारी के पद से रिटायर हुए एसएस राव भी बीजेपी की टिकट पर चुनाव लडना चाहते थे। वह अपने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें नई दिल्ली सीट पर रहने वाली सारी रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, शॉपकीपर्स एसोसिएशन और एनडीएमसी के रिहायशी फ्लैटों में रहने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर सारे अफसर निजी तौर पर जानते हैं। ऐसे में उन्हें टिकट मिलता तो पार्टी प्रत्याशी के पास पहचान का संकट नहीं रहता। अब वर्तमान प्रत्याशी रहते तो रोहिणी में हैं और चुनाव नई दिल्ली में लड़ रहे हैं। ऐसे में उनका चुनाव कैसा होगा, वह तो आने वाला समय ही बताएगा।
 
नई दिल्ली सीट के गोल मार्केट इलाके में रहने वाले कई बीजेपी पदाधिकारियों से बात की तो उनका कहना था कि हम तो अपने इलाके के पूर्व जिलाध्यक्ष पंकज जैन के साथ काम कर रहे हैं। इस सीट पर पार्टी को जब किसी लोकल उम्मीदवार की जरूरत नहीं है तो कार्यकर्ता की भी जरूरत नहीं होगी।
 
लेखक पीयूष जैन नवभारत टाइम्स समेत कई बड़े अखबारों में विभिन्न पदों पर रहे हैं. पीयूष ने बतौर रिपोर्टर दिल्ली की सियासी चाल-चलन व धड़कन को बहुत नजदीक से महसूस किया है. पीयूष पत्रकारिता क्षेत्र में लगातार आ रही गिरावट से निराश होकर न्यायिक क्षेत्र की तरफ कदम बढ़ाया और इन दिनों तेजतर्रार वकील के बतौर कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं. पीयूष से संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.
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