Deepak Sharma : सेर हैं तो सवा सेर भी हैं… राजनीति किसी मनमोहन, मोदी या मुलायम से नहीं चलती …..पत्रकारिता किसी अर्नब किसी बरखा से नहीं चलती… कहीं हुंकार भरता कोई केजरीवाल है, कहीं भड़ास निकालता कोई यशवंत और कहीं… पर कतरता कोई अनस भी है इस व्यवस्था में. जब ये हारने लगते हैं तो कोई जेठमलानी, कोई भूषण अदालत में उतर आता है… और जब अदालतें रुकती-सरकती हैं तो पीछे से कोई CAG कोई CBI में ही मर्द निकलकर झूठ के पांव पकड़ लेता है.
मित्रों सेर है तो सवा सेर भी है दुनिया में. कोई खुद पर गुमान ना करे क्यूंकि सबकी काट है. मंच पर चढ़कर अपने कुर्ते की आस्तीनें वो लोग चढ़ाते हैं जिन्हें अपनी ही आस्तीनों में सांप दिखते है. जिन्हें दूसरों की आस्तीने दिखती ही नहीं वो क्या बताएंगे इस देश को?.
मित्रों गुमान तो इंदिरा गाँधी का भी नहीं रहा था …उन्हें भी कोई जार्ज, कोई वाजपेई, कोई जेपी मिल गए थे. गुमान नस्ली वाडिया और जेआरडी टाटा का भी नहीं रहा.. उन्हें भी कफ परेड की सुनहरी गलियों में कोई धीरूभाई मिल गए थे. गुमान सत्ता से बड़े होते उन पत्रकारों का भी नहीं रहा जिन्हें किसी राडिया का आडियो टेप मिल गया.
मित्रों मैंने ये सच्चाई इसलिए लिखी क्यूंकि सत्ता के एक बड़े दलाल पत्रकार आज मुझसे कह रहे थे कि सरकार के मुखालिफ अब जो भी आया तो उसे निपटा दिया जायेगा…. वो चाहे सीबीआई का कोई अफसर हो या कोई पत्रकार या फिर पीआईएल करने वाला कोई व्याकुल कार्यकर्ता.
मित्रों डराने, धमकाने वाले ये दलाल जान ले कि सच के सीने में छुरी उतारने से सच मरता नही और बड़ा हो जाता है.
एक शेर अर्ज है बरेली के महबूब शायर वसीम भाई का.
खुली छतों के दिये कब के बुझ गए होते
कोई तो है जो हवाओं के पर कतरता है
आजतक न्यूज चैनल में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा के फेसबुक वॉल से.






