अमर उजाला में इंक्रीमेंट बंट गया है। वरिष्ठ उप संपादक से लेकर न्यूज एडिटर तक को। अमर उजाला उत्तर प्रदेश में तो स्टेट हेट इंदु शेखर पंचोली की ही चली है। उन्होंने लखनऊ यूनिट में 10 से 15 प्रतिशत इंक्रीमेंट करवाया है जबकि अन्य यूनिटों में दो से चार प्रतिशत ही इंक्रीमेंट मिला है। इस दोहरे व्यवहार से अमर उजाला के संपादतीय में उथल-पुथल की नौबत है। कई लोग इधर-उधर मुंह मार रहे हैं।
बनारस यूनिट में कई लोग दूसरे अखबारों के संपर्क में हैं। इंक्रीमेंट में दोहरे व्यवहार से कई लोग यह कहते फिर रहे हैं कि उन्हें लखनऊ के बजाय दूसरी यूनिट में रखा तो कंपनी ने। फिर उनके साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों हो रहा है? क्या लखनऊ में महंगाई है और दूसरी जगह नहीं? इस संबंध में कई लोगों ने अमर उजाला के कर्ताधर्ता राहुल माहेश्वरी को चिट्ठी भी भेजी है।
एक पत्रकार की ओर से भेजी गई मेल पर आधारित. भड़ास तक आप भी अपनी बात पहुंचाएं, [email protected] पर मेल करके.





