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महाराष्ट्र के हदगाव में पत्रकार के उपर हमला

महाराष्ट्र में पत्रकारों के उपर हो रहे हमले रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं. दो दिन पहले नांदेड जिले के हदगाव में गावकरी के संवाददाता शिवाजी देशमुख पर जानलेवा हमला हुआ. अपने काम से लौट रहे शिवाजी को चार गुंडों ने पकड़ लिया और उनकी मारा पीटा. उन्हें चाकू से मारने की कोशिश की गयी लेकिन वार मोटरसाईकल पर लगने से शिवाजी बाल-बाल बच गये. तब तक स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़ पड़े. लोगों को आता देखकर बदमाश भाग निकले. पता चला है कि एक शुगर फैक्टरी के कार्यक्रम में किसानो को नहीं बुलाने के खिलाफ खबर देने से इलाके के कुछ राजनेता नाराज थे. इसी कारण यह हमला किया गया. 
महाराष्ट्र में पत्रकारों के उपर हो रहे हमले रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं. दो दिन पहले नांदेड जिले के हदगाव में गावकरी के संवाददाता शिवाजी देशमुख पर जानलेवा हमला हुआ. अपने काम से लौट रहे शिवाजी को चार गुंडों ने पकड़ लिया और उनकी मारा पीटा. उन्हें चाकू से मारने की कोशिश की गयी लेकिन वार मोटरसाईकल पर लगने से शिवाजी बाल-बाल बच गये. तब तक स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़ पड़े. लोगों को आता देखकर बदमाश भाग निकले. पता चला है कि एक शुगर फैक्टरी के कार्यक्रम में किसानो को नहीं बुलाने के खिलाफ खबर देने से इलाके के कुछ राजनेता नाराज थे. इसी कारण यह हमला किया गया. 
 
जब शिवाजी कम्प्लेन करने पुलिस स्टेशन गये तो इंस्पेक्टर राजा टेहेरे ने उनकी कम्प्लेन लेने से इन्कार किया. नांदेड के पत्रकार हमला विरोधी कृती समिति के निमंत्रक केशव पाटील के एसपी से बात करने के बाद शिवाजी की कम्प्लेन ली गयी. लेकिन दूसरे दिन हमलावारों ने शिवाजी पर ही दुर्व्यवहार की तकरीर दी तथा उन पर चोरी का इल्जाम भी लगाया. इस फर्जी तकरीर से संतप्त हदगाववासियों ने पत्रकार के समर्थन में हदगाव बंद करके अपना क्रोध प्रकट किया. पत्रकार पर हमला होने के बाद शहरवासियों द्वारा शहरबंद करके हमले का विरोध करने की यह पहली घटना थी. लोगों के गुस्से को भांपकर पुलिस ने दो हमलावरों को गिरफ्तार किया है. 
 
इस हमले का महाराष्ट्र पत्रकार हमला विरोधी कृती समिती के अध्यक्ष एस.एम. देशमुख ने कड़े शब्दों में आलोचना की है. महाराष्ट्र में पिछले तीन साल में हुआ यह 313 वां हमला है. हमले बढते जाने के बावजूद भी सरकार कुछ नहीं कर रही है. इसके विरोध मे 9 दिसम्बर से नागपुर मे शुरू हो रहे महाराष्ट्र विधान सभा के अधिवेशनकाल मे आंदोलन करने का निर्णय पत्रकार हमला विरोधी समिति ने किया है. इस बीच जिस पीआई ने शिवाजी की तकरीर लेने से इन्कार किया था वह पीआई दस हजार की रिश्वत लेते हुए एन्टी करप्शन के शिकंजे में फंस गया. उसे अरेस्ट कर लिया गया है.
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