सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासी शिक्षिका सोनी सोरी और पत्रकार लिंगाराम को जमानत पर रिहा करने का जो आदेश दिया था, उस पर अमल करते हुए और औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद आज दोनों को जगदलपुर जेल से रिहा कर दिया गया. रिहाई के बाद सोनी सोरी को संवाददाताओं ने घेर लिया और सवालों की बौछार कर दी. पत्रकार लिंगाराम भी खुद को आजाद पाकर काफी खुश महसूस कर रहे थे.



फोटो सौजन्य से रवीश राज परमार
ज्ञात हो कि न्यायमूर्ति सुरिन्दर सिंह निज्जर और न्यायमूर्ति एफएम इब्राहीम कलीफुल्ला की सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने सोरी और लिंगाराम को जमानत पर रिहा करने का आदेश देने के साथ ही उन्हें इस मामले की जांच पूरी होने तक छत्तीसगढ़ राज्य में नहीं रहने का भी निर्देश दिया.
छत्तीसगढ़ सरकार के वकील अतुल झा ने दोनों की जमानत अर्जी का विरोध किया लेकिन न्यायालय ने कहा कि यदि किसी अन्य मामले में वे अभियुक्त नहीं हों तो उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाये. इन दोनों ने छत्तीसगढ उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी. उच्च न्यायालय ने आठ जुलाई को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी.
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