गांधी मेमोरियल म्यूजियम एवं सेंटर फॉर एक्सपीरियंसिंग सोशियो कल्चरल इंटरऐक्शन (सीईएससीआई) के संयुक्त तत्वावधान में मुदुरै (तमिलनाडु) में पिछले दिनों माजा कोयने 2013 अवार्ड सम्मान समारोह आयोजित किया गया. माजा कोयने सोशल जर्नलिस्ट अवार्ड एनडीटीवी, नई दिल्ली के हिमांशु शेखर मिश्र और भोपाल की वरिष्ठ पत्रकार रूबी सरकार को प्रदान किया गया.
रूबी सरकार को यह सम्मान मुख्यधारा से अलग आदिवासी और दलित समुदायों की आर्थिक-सामाजिक स्थिति तथा उनकी रोजमर्रा के जीवन से जुड़े मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित समुदाय के संघर्षों को अपने लेखन के माध्यम से उजागर करने के लिए प्रदान किया गया. रूबी सरकार के लेखनी से सरकार का ध्यान इन समुदायों की समस्याओं की ओर गया और मध्यप्रदेश सरकार ने उन समस्याओं के निराकरण के लिए समुचित प्रयास किये. एनडीटीवी के हिमांशु शेखर मिश्र को अक्टूबर 2012 की अहिंसात्मक जनसत्याग्रह पदयात्रा देश के निरंतर कवरेज के लिए यह अवार्ड प्रदान किया गया. श्री मिश्र ने देश के कोने-कोने से आये 50 हजार आंदोलनकारियों की समस्याओं को लोगों तक पहुंचाया.
अण्डमान के फिल्म निर्माता नरेशचंद्र लाल को गांधी के विचारों को फिल्म के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने और कदम स्वयंसेवी संस्था, जबलपुर को पर्यावरण संरक्षण के लिए माजा कोयने सोशल एक्टिविस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया. माजा कोयने पीस अवार्ड कोलंबिया के ऑरक्यूडिया परेज़ (55) और मारिया लिगिया (75) को प्रदान किया गया. इनके प्रतिनिधि के रूप में नतालिया राड्रीग्वेज ने यह पुरस्कार ग्रहण किया. इन दोनों को यह पुरस्कार गांधी जी के अहिंसात्मक आंदोलन के जरिये मुख्यधारा से अलग समुदायों के गैर कानूनी ढंग से वहां की सरकार और बड़े कंपनियों द्वारा जबरन उनकी भूमि अधिग्रहण को रोकने के लिए प्रदान किया गया. 35 वर्षीय नतालिया भी इस आंदोलन से जुड़ी हैं.
सीईएससीआई स्विटज़रलैण्ड की अध्यक्ष मारग्रेट ल्यूगेन टोबलर और महात्मा गांधी केनेडियन फाउण्डेशन फॉर वर्ल्ड पीस की अध्यक्ष रेवा जोशी ने संयुक्त रूप से सभी विजेताओं को शॉल, प्रशस्ति पत्र और नगद राशि प्रदान कर सम्मानित किया. सम्मान पत्र का वाचन सीईएससीआई के सचिव राजगोपाल पीवी ने किया. इस अवसर पर देशभर से गांधी के विचारों को आगे ले जाने वाली अनेक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
माजा कोयने स्विटजरलैण्ड की रहने वाली एक स्कालर और बहुत अच्छी फोटोग्राफर थीं. उन्हें भारत में फोटो जर्नलिस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में याद किया जाता है. माजा गांधीजी के अहिंसात्मक आंदोलन से प्रभावित होकर एकता परिषद से जुड़कर सामाजिक बदलाव के लिए काम करने लगी. माजा ने वर्ष 1996 में राजगोपाल पीवी के साथ मिलकर सीईएससीआई की स्थापना की थी. वर्ष 1999 में कैंसर से उनका निधन हो गया था. तब से उनकी याद में हर वर्ष यह पुरस्कार दिया जाता है.