महारा्ष्ट्र। जलगांव जिले के चालीसगांव के युवा पत्रकार नरेश सोनार की कल दोपहर दादर-अमृतसर चलती गाड़ी से बाहर फेककर निर्मम हत्या कर दी गयी. सोनार मायके गई अपनी पत्नी को लाने रावेर जा रहे थे. गाड़ी में कुछ असामाजिक तत्वों के साथ उनका झगडा हुआ. यह झगडा इतना बढ़ गया कि बरहानपुर रेलवे स्टेशन के पास गुंडो ने उन्हें चलती गाड़ी के बाहर फेंक दिया. जिनकी वजह से उन्हें गहरी चोटें आईं और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई.
चिंता की बात यह कि, जब नरेश जब इन गुंडों से लड़ रहे थे तब डिब्बे का एक भी यात्री उनकी मदद के लिए सामने नहीं आया. यहां रेलवे प्रशासन की लापरवाही का भी मामला आया है. बरहानपुर के पहले स्टेशन पर नरेश ने स्टेशन मास्टर आर.के.सिंह को गुंडों द्वार परेशान किये जाने की जानकारी दी थी. लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की जिस वजह से एक उम्दा पत्रकार अपनी जान गवां बैठा. अगर रेलवे प्रशासन समय रहते उनकी शिकायत पर ध्यान दे देता तो उनकी जान बच जाती. बाद में तीनों बदमाशों जकिरुद्दीन रतिमुद्दीन खान, मिराज खान, मकबूल खान (रासाबदा, ताजिबांदा-उत्तरप्रदेश के रहने वाले) को कब्जे में ले लिया गया है.
इस वारदात पर महाराष्ट्र के पत्रकार जगत में काफी आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है. पत्रकार हमला विरोधी कृती समिती के अध्यक्ष एस.एम.देशमुख ने इस घटना की निंदा करते हुए सरकार पर पत्रकारों को संरक्षण देने मे पूर्णतः असफल होने का आरोप लगाया है. देशमुख ने कहा कि इस वारदात के बाद तो सरकार को अपना रवैया बदलना चाहिए और जल्द से जल्द राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून लाना चाहिए.
इसी बीच महाराष्ट्र में पत्रकारों के उपर बढ़ते हमले के विरोध में समूचे महाराष्ट्र में कल का (16 नवम्बर) राष्ट्रीय पत्रकार दिवस निषेध दिवस के तौर पर मनाया जा रहा है. कल पत्रकार अपने हाथ ब्लैक रिबन लगाकर काम करेंगे एव पत्रकार दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सभी सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार करेंगे