Wasim Akram Tyagi : सावधान क्रूसेडी चालू आहो… खबर मिली है कि आरएसएस एक इस्लामी चैनल लांच करने जा रहा है जिसके द्वारा इस्लाम को लोगों तक पहुंचाया जायेगा। गौरतलब है कि संघ परिवार (मुस्लिम राष्ट्रीय मंच जिसकी स्थापना संघ के प्रचारक इंद्रेश कुमार ने की थी ) पहले से ही मुसलमानों को मुख्यधारा में लाने के लिये काम कर रहा है। संघ परिवार टीवी चैनल के साथ साथ उर्दू अखबार और एक एफएम रेडियो चैनल भी लांच करने जा रहा है। अगले महीने मुंबई में होने वाली मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सम्मेलन में इसको अमली जामा पहनाया जा सकता है।
सवाल उठता है कि कल तर इस्लाम और मुसलमानों को पानी पी – पी कर कौसने आज उसका प्रचार करने के लिये अचानक तैयार नहीं हुऐ हैं। बल्कि इसके पीछे गहरी साजिशें छिपी हुई हैं। वे इस्लाम को लोगों में इस तरह प्रचारित करेंगे जिससे लोगों में खासकर मुसलमानों में जातियों में विभाजित हो जाये, जैसे कादियानी, वहाबी, अहमदी, इत्यादी। जैसे विश्व में हो रहा है अमेरिका और इजरायल से वित्त पोषित होता है, अलशबाब जैसे वहाबी संगठन को जिसने नैरोबी में धमाके किये थे जिसमें सैंकड़ों मासूम लोगों की जानें पल भर में चली गई थी।
ऐसा ही कारनामा भारत में आरएसएस जैसा फांसीवादी संगठन अंजाम देता आया है। और जब इसकी शहीद हेमंत करकरे ने पोल खोली तो अब इन्होंने नया शिगूफा अपनाया है। इस तरह के काम करने के लिये। जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी बची रहे। इस मानसिकता को समझना होगा। कल बहुसंख्यक समाज को अल्पसंख्यक खासतौर से मुस्लिम समाज के प्रति भड़काने वाले, इतिहास से तोड़ मरोड़ करने वाले, लालकिले, ताजमहल, कुतुबमीनार को प्राचीन मंदिर बताने वाले आज इस्लाम का प्रचार करने के लिये अखबार और चैनल लांच करने जा रहे हैं।
आखिर इसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे? इसे समझना हम सबकी जिम्मेदारी है । जिस संगठन की स्थापना का उद्देश्य ही देश में अफरातफरी फैलाना हो, लोगों को धार्मिक आधार पर भड़काना हो, जिसके कार्यकर्ता की पहली पसंद वह शख्स हो जो पांच हजार लोगों के कत्ल का जिम्मेदार है, वह संगठन आखिर इतना नरम कैसे हो गया? खबर में जो बात कही गई है उसमें एक बात यह भी है कि सोशल नेटवर्किंग साईटों पर भी इसका प्रचार किया जायेगा।
इससे जाहिर होता है कि इन साईटों पर जो संघी फौज है उसने उन बातों को देखा हो जिसमें मुसलमानों की ओर से शिकायत रहती है कि मीडिया उन्हें इसलिये प्रताड़ित करता है कि उनके पास अपना मीडिया नहीं है। इसलिये मुसलमानों का भी कोई मीडिया हाऊस होना चाहिये जिससे सच को सामने लाया जा सके। संघ ने उसी जरूरत को पूरा करने के लिये इस ओर कदम बढ़ाया है वर्ना क्या कारण है कि कल तक जो समाज उसे फूटी आंख नहीं भाता था उसकी अचानक इतनी फिक्र सताने लगी। इस लिये इस नरम क्रूसेडी को समझना होगा।
युवा पत्रकार वसीम अकरम त्यागी के फेसबुक वॉल से.





