झारखंड सरकार ने कल पत्रकारों के लिए 5 लाख की बीमा योजना की शुरुआत कर दी. अब पत्रकारों के लिए इतनी अच्छी खबर आयी तो हर न्यूज पेपर में इसे स्थान मिलना ही था और मिला भी. लेकिन एक है भास्कर उसने इस खबर को कोई कवरेज नहीं दिया. भास्कर वालों के लिए पत्रकारों की खबर कोई खबर ही नहीं है या भास्कर वाले शायद नक्सल प्रभावित इलाके में पत्रकारिता कैसे होती है ये ना जानते होंगे. वरना जो पत्रकार जान हथेली पर रखकर खबरों के लिए नक्सल प्रभावित इलाकों में जाते हैं उन पत्रकारों को मिलने वाली सुविधा की खबर कैसे ना छापते.
झारखंड के पत्रकार भास्कर के इस पत्रकार विरोधी रवैये से काफी नाराज हैं. पत्रकारों में ये चर्चा है कि भास्कर पत्रकार विरोधी है. एक तो पत्रकारों की हालत ऐसे ही इतनी दयनीय है. ना तो उन्हें समय से वेतन मिलता है ना ही ये पता होता है कि कब नौकरी से निकाल दिये जायेंगे. ऐसे में अगर सरकार ही पत्रकारों के लिए कुछ सुविधा दे रही है तो भास्कर वाले क्यूं इस खबर को प्रमुखता नहीं दे रहे हैं. जबकि सब न्यूज पेपर इसे कवरेज दे रहे हैं.
झारखंड नक्सल प्रभावित राज्य है जिस वजह से वहां पत्रकारिता करना जोखिम का काम है. एक तो पत्रकारों को मिलने वाला वेतन इतना कम होता है कि उसमें ठीक से घर चल जाय वही बहुत है अब अगर ऐसे में किसी पत्रकार के साथ दुर्घटना हो जाय तो परिवार के लिए बहुत मुश्किलें आ जाती हैं. इस योजना के आने से अब पत्रकार कम से कम कुछ तो निश्चिंत हो ही सकते हैं.
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