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भास्कर के आने से पटना की अखबारी मंडियों में भगदड़

बिहार की राजधानी पटना से भास्कर के प्रकाशन की तैयारी क्या शुरू हुई पटना की अखबारी मंडियों में भगदड़ मची हुई है। नये तो नये पुराने पत्रकार भी मुंह बाये खड़े हैं। अखबारों का मैनेजमेंट तो सकते में है ही। पहले तीनों हिन्दुस्तान, जागरण और प्रभात खबर प्रबंधन की मनमानी चलती थी। पत्रकारों के हितों पर प्रबंधन की राय अलग-अलग रहती है लेकिन अखबार का दाम तय करना हो तो सब एकजुट हो जाते है। अर्थात पाठकों का दोहन करने में एक साथ हैं।
 
भास्कर ने इन लोगों की खैरियत खबर लेनी शुरू कर है बड़े-बड़े यह बोर्ड लगाकर– देश में सबसे महंगे अखबार पटना में क्यों! यह तो हुई यहां मठाधीश से बन चुके अखबारों के प्रबंधन को औकात दिखाने की एक छोटी सी पहल। तीनों अखबारों ने अपना रेट ढाई रूपया कर दिया है। उस पर से नाना प्रकार की स्कीम। सवाल है कि इतने वर्षों तक पाठकों का आर्थिक शोषण क्यों किया हिन्दुस्तान, जागरण और प्रभात खबर के प्रबंधन ने।
 
बात अब अखबारों में चल रही आपाधापी के संबंध में। प्रायः सभी अखबारों के विभिन्न डिपार्टमेंटों में भगदड़ मची हुई है। सबके पांव भास्कर की ओर हैं। अभ्यर्थियों की सबसे ज्यादा संख्या हिन्दुस्तान वालों की है। अपने पालिटिकल एडिटर की कारगुजारियों और तानाशाही रवैये से आजिज एक दर्जन से अधिक एडिटोरियल स्टाफ भास्कर की ओर मुखातिब है। कइयों की मुलाकात भास्कर प्रबंधन के लोगों से यहां के मौर्या होटल में हो चुकी है। किसी भी वक्त ये हिन्दुस्तान को बाय-बाय बोल सकते हैं। राष्ट्रीय सहारा में छंटनी की भनक पा कई वरिष्ठ लोग कतार में लगे हैं। एक-दो की बात पक्की भी हो चुकी है। वेतन देने में महा कंजूस प्रभात खबर को बड़ा झटका लग सकता है। भास्कर के आरई प्रमोद मुकेश यहां से एक साथ बड़ी फौज को तोड़ कर लाने की जुगत में हैं। प्रमोद मुकेश पहले प्रभात खबर में आरई थे। मुकेश के हटने के बाद बाहर से आये प्रभात खबर के नये आरई से अखबार सम्हल नहीं रहा है या पुराने कर्मी सहयोग नहीं कर रहे हैं। कुल मिला कर सबसे ज्यादा नुकसान पीके को ही होने की संभावना है।
 
पटना से एक पत्रकार की रिपोर्ट


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पटना में जागरण भी ढाई रुपये का, अब क्या करे प्रभात खबर

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